CBI Vs CBI मामला : सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा अहम फैसला

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सुप्रीम कोर्ट केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक आलोक कुमार वर्मा को उनके अधिकारों से वंचित कर अवकाश पर भेजने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ उनकी याचिका पर मंगलवार को अहम फैसला सुनाएगा। जांच ब्यूरो के निदेशक आलोक कुमार वर्मा और ब्यूरो के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी जंग सार्वजनिक होने के बाद सरकार ने पिछले साल 23 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों को उनके अधिकारों से वंचित कर अवकाश पर भेजने का निर्णय किया था।

सुप्रीम कोर्ट

दोनों अधिकारियों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये थे। केंद्र ने इसके साथ ही ब्यूरो के संयुक्त निदेशक एम नागेर राव को जांच एजेंसी के निदेशक का अस्थाई कार्यभार सौंप दिया था। सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा ने पूर्व जॉइंट डायरेक्टर राकेश अस्थाना के साथ विवाद के चलते शक्तियां छीने जाने और छुट्टी पर भेजने के खिलाफ याचिका दायर की थी। इस पर शीर्ष अदालत फैसला सुनाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसंबर को मामले की सुनवाई के बाद इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट में आलोक वर्मा के अलावा एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से अर्जी दाखिल कर मामले की एसआईटी जांच की मांग की थी। साथ ही सरकार द्वारा छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सीवीसी से जवाब दाखिल करने को कहा था।

सीवीसी ने दलील दी थी कि स्थिति विशेष परिस्थिति वाली थी इसी कारण यह फैसला हुआ है। सीबीआई डायरेक्टर के वकील फली एस नरीमन ने दलील दी थी कि सीबीआई डायरेक्टर के मामले को व्यापक तौर पर देखा जाना चाहिए। एनजीओ के वकील दुष्यंत दवे ने कहा था कि विनीत नारायण जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्देश जारी किया था उसके तहत पीएम, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस की कमिटी होगी जो हाई पावर कमिटी होगी और सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति वही करेगी साथ ही उनकी मंजूरी से ही ट्रांसफर होगा।

वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में 23 अक्टूबर, 2018 को याचिका दाखिल कर तीन आदेशों को खारिज करने की मांग की थी। इनमें से एक आदेश केंद्रीय सतर्कता आयोग और दो केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने जारी किए थे। वर्मा ने अपनी याचिका में कहा था कि इस फैसले में केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अपने क्षेत्राधिकार का उल्लंघन किया है। वर्मा ने कहा था कि इन फैसलों में अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन किया गया।

केंद्र सरकार ने वर्मा और अस्थान के बीच विवाद के बाद दोनों को हटाते हुए संयुक्त निदेशक एम. नागेश्वर राव को अंतरिम मुखिया बना दिया था। बता दें कि बीते 6 दिसंबर को आलोक वर्मा, केंद्र सरकार और सीवीसी के पक्षों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने इस मामले पर फैसला सुरक्षित रखा था।

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