रिश्वत मामला: राकेश अस्थाना केस में CBI की बड़ी कार्रवाई, एजेंसी ने अपने ही डिप्टी SP को किया गिरफ्तार

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इस समय देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) खुद सवालों के घेरे में आ गई है। सीबीआई के सीनियर अधिकारी एक दूसरे के ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। एजेंसी के अंदर जारी घमासान के बीच सीबीआई ने अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ रिश्वत के आरोपों के संबंध में एजेंसी के डिप्टी एसपी (SIT) देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया है। देवेंद्र कुमार को मोईन कुरैशी से संबंधों के चलते गिरफ्तार किया गया है।

सीबीआई ने अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना पर रिश्वत लेने के आरोप से जुड़े मामले में अपने ही उप अधीक्षक देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने मांस निर्यातक मोईन कुरैशी मामले में रिश्वत के अारोपों में अस्थाना, कुमार तथा कुछ अन्य लाेगों के खिलाफ हाल ही में प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि इन्होंने मामले को कमजोर करने के लिये रिश्वत ली थी। कुमार इस मामले में पहले जांच अधिकारी रह चुके हैं।
सीबीआई सूत्रों ने सोमवार को बताया कि कुमार को मोईन कुरैशी मामले में एक गवाह सतीश साना के बयान में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में गिरफ़तार किया गया है। सूत्रों के अनुसार कुमार ने यह दर्शाया था कि सतीश साना का बयान गत 26 सितंबर को दिल्ली में दर्ज किया गया था लेकिन एजेंसी की जांच में सामने आया है कि इस दिन सतीश साना हैदराबाद में था। वास्तव में वह एक अक्टूबर को दिल्ली में जांच प्रक्रिया में शामिल हुआ था।
आपको बता दें कि सीबीआई के दूसरे क्रम के अधिकारी और विशेष निदेशक (स्पेशल डायरेक्टर) राकेश अस्थाना पर तीन करोड़ रुपये घूस लेने के आरोप लगने के बाद सनसनी फैल गई है। इससे पहले रविवार को एक अप्रत्याशित कदम के तहत सीबीआई ने अपने स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के खिलाफ मोइन कुरैशी से 3 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, वहीं दो महीने पहले अस्थाना ने कैबिनेट सचिव से सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ यही शिकायत की थी। अस्थाना ने कैबिनेट सचिव को शिकायत भेजी थी कि सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा ने कुरैशी केस में आरोपी सतीश साना से रिश्वत ली है। खास बात ये कि साना वो शख्स है जिसने अस्थाना के खिलाफ शिकायत की थी। सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर ने 24 अगस्त को कैबिनेट सचिव के साथ हुई मुलाकात में वर्मा पर सना से 2 करोड़ रुपए रिश्वत लेने का आरोप लगाया था।

राकेश अस्थाना के अलावा एजेंसी ने डिप्टी एसपी देवेंद्र कुमार और मनोज प्रसाद, कथित बिचौलिये सोमेश प्रसाद और अन्य अज्ञात अधिकारियों पर भी मामला दर्ज किया है। उन पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा सात, 13(2) और 13 (1) (डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा उन पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा सात-ए भी लगाई गई है। सीबीआई ने सूचित किया कि इन धाराओं में किसी अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सरकार से अनुमति लेने के जरूरत नहीं होती।
सीबीआई ने सतीश साना की शिकायत के आधार पर विशेष निदेशक अस्थाना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। मांस कारोबारी मोईन कुरेशी की कथित संलिप्तता से जुड़े 2017 के एक मामले में जांच का सामना कर रहे साना ने आरोप लगाया कि अस्थाना ने उसे क्लीनचिट दिलाने में कथित रुप से मदद की। सीबीआई ने बिचौलिया समझे जाने वाले मनोज प्रसाद को भी 16 अक्टूबर को दुबई से लौटने पर गिरफ्तार किया था।
गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी अस्थाना उस विशेष जांच दल (एसआईटी) की अगुवाई कर रहे हैं जो अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले और उद्योगपति विजय माल्या द्वारा की गई कर्ज धोखाधड़ी जैसे अहम मामलों को देख रहा है। यह दल मोईन कुरैशी मामले की भी जांच कर रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार अस्थाना ने 24 अगस्त को कैबिनेट सचिव को एक विस्तृत पत्र लिखकर वर्मा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के 10 मामले गिनाए थे।
इसी पत्र में यह भी आरोप लगाया गया था कि साना ने इस मामले में क्लीनिचट पाने के लिए सीबीआई प्रमुख को दो करोड़ रुपये दिए। सूत्रों के अनुसार यह शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग के पास भेजी गयी जो इस मामले की जांच कर रहा है।अस्थाना ने प्राथमिकी दर्ज होने के चार दिन बाद केंद्रीय सतर्कता आयुक्त को फिर लिखा कि वह साना को गिरफ्तार और पूछताछ करना चाहते हैं और इस संबंध में 20 सितंबर, 2018 को निदेशक को एक प्रस्ताव भेजा गया था।

अपने पत्र में उन्होंने 24 अगस्त को कैबिनेट सचिव को लिखी अपनी चिट्ठी का भी हवाला दिया जिसमें निदेशक के खिलाफ कथित अनियमितताओं का ब्योरा दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि निदेशक ने करीब चार दिनों तक फाईल कथित रुप से रखी और 24 सितंबर, 2018 को उसे अभियोजन निदेशक (डीओपी) के पास भेजने का निर्देश दिया। अभियोजन निदेशक ने रिकार्ड में मौजूद सभी सबूत मांगे।
सूत्रों के अनुसार अस्थाना की अगुवाई वाली टीम ने ही साना के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर खोला जिसने देश से भागने की कोशिश की लेकिन सक्रिय कार्रवाई की वजह से वह नहीं भाग सका। सूत्रों के मुताबिक अस्थाना ने कहा है यह फाइल डीओपी द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर के साथ फिर तीन अक्टूबर को सीबीआई निदेशक के समक्ष फिर रखी गयी लेकिन अबतक यह नहीं लौटी है।
सूत्रों ने अस्थाना की बातों का हवाला देते हुए कहा कि साना से एक अक्टूबर, 2018 को पूछताछ की गयी थी, पूछताछ के दौरान साना ने बताया कि वह एक नेता से मिला जिसने वर्मा से मुलाकात करने के बाद उसे आश्वासन दिया कि इस मामले में उसे क्लीनचिट दे दी जाएगी।

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