अब 2 लाख रुपये से ज्यादा नहीं कर सकेंगे नकद लेनदेन, साथ ही आयकर रिटर्न के लिए अनिवार्य होगा आधार

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नोटबंदी के बाद सरकार ने कालाधन के खिलाफ अभियान जारी रखते हुए एक और कठोर कदम उठाया है। सरकार ने ‘वित्त विधेयक 2017’ में संशोधन का प्रस्ताव किया है, जिसके पारित होने पर अब एक अप्रैल से दो लाख से अधिक का नकद लेन-देन अवैध माना जाएगा। सरकार ने पहले यह सीमा तीन लाख रुपये तय करने का प्रस्ताव किया था।

Ban on cash transaction

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने पहली फरवरी को पेश वित्त विधेयक 2017 में मंगलवार(21 मार्च) को 40 संशोधन के प्रस्ताव किये जो एक अभूतपूर्व बात है। संशोधन प्रस्तावों की इतनी अधिक संख्या का विपक्षी आरएसपी, तृणमूल कांग्रेस और बीजद की अगुवाई में विपक्षी दलों ने पुरजोर विरोध किया।

विपक्षी सदस्यों ने इसे गैर कर विधेयकों को पिछले दरवाजे से धन विधेयक के रूप में पारित करने की सरकार की चाल बताया। उनका कहना था कि इस तरह सरकार गैर कर विधेयकों पर राज्य सभा की स्वीकृति लेने की जरूरत खत्म करना चाहती है जहां सत्तारूढ गठबंधन को बहुमत नहीं हैं।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने विपक्षी दलों की आपत्तियों को खारिज करते हुए व्यवस्था दी कि संशोधनों से संबंधित आकस्मिक प्रावधानों को धन विधेयक के रूप में वित्त विधेयक का हिस्सा माना जा सकता है।

वित्त विधेयक में जो संशोधन हैं उनमें सबसे महत्वपूर्ण नकद लेनदेन की सीमा 2 लाख रुपये करने का प्रावधान है। गत एक फरवरी को बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरण जेटली ने यह सीमा एक अप्रैल के प्रभाव से तीन लाख रपये करने का प्रस्ताव रखा था।

वहीं, एक जुलाई से अपना ‘आधार’ नंबर आयकर विभाग को नहीं देने पर पैन(परमानेंट अकाउंट नंबर) नंबर रद्द हो जाएगा। जुलाई से पैन नंबर बनवाने व आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए भी ‘आधार’ नंबर अनिवार्य होगा। आयकर रिटर्न भरने के लिए आधार का जिक्र अनिवार्य करने तथा काले धन के खिलाफ अभियान जारी रखते हुए निर्वाचन ट्रस्ट में केवल चैक के जरिये ही चंदा दिये जाने की व्यवस्था किए जाने का मंगलवार को प्रस्ताव किया।

इसके अलावा कंपनी कानून, 2013 में भी संशोधन किया गया। इसके तहत कंपनियों द्वारा निर्वाचन ट्रस्ट को चंदा केवल खातों में चैक, बैंक ड्राफ्ट या इलेक्ट्रानिक अंतरण के जरिए ही किए जाने का प्रस्ताव किया गया है। यह कदम जेटली के बजट प्रस्ताव के अनुरूप है, जिसमें निर्वाचन बांड की बात कही गयी है।

इसे चंदा देने वाले चैक देकर अनुसूचित बैंक से खरीद सकते हैं और इसे केवल अधिसूचित बैंक में राजनीति दल के खाते में ही भुनाया जा सकता है। जेटली ने कहा कि इस कदम का मकसद राजनीतिक चंदे को स्वच्छ करना है.

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