चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में माना, एक प्रत्याशी का दो जगहों से चुनाव लड़ना गलत

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चुनाव आयोग ने सोमवार (11 दिसंबर) को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष माना है कि एक प्रत्याशी का दो सीटों से चुनाव लड़ना गलत है और ऐसा नहीं होना चाहिए। चुनाव आयोग ने माना कि इस तरह की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाए जाने की जरूरत है।सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र की बेंच ने एक प्रत्याशी के दो जगहों से चुनाव लड़ने पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अटॉर्नी जनरल से सहयोग मांगा है।चुनाव आयोगप्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्र, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय से कहा कि याचिका की प्रति अटार्नी जनरल को दी जाए ताकि वह इस मामले में मदद कर सकें। अदालत ने कहा कि वह तीन हफ्ते बाद इस मामले की सुनवाई करेगी।

सोमवार को सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि एक उम्मीदवार को दो सीटों से चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। आयोग ने कहा कि एक उम्मीदवार जब दो जगहों से जीतता है और बाद में एक सीट से इस्तीफा देता है तो उस सीट पर दोबारा चुनाव कराने होते हैं। इससे खर्च का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। 2004 और 2016 में इस बारे में प्रस्ताव दिया गया था।

याचिका में कहा गया है कि केंद्र और निर्वाचन आयोग को लोगों को एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लडने से रोकने के लिये उचित कदम उठाने के निर्देश दिए जाएं। याचिका में कहा गया है कि संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिये गठित आयोग के सुझाव के अनुसार लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव लडने के प्रति हतोत्साहित करने के लिये भी उचित कदम उठाये जायें।

उपाध्याय ने विधि आयोग की 170वीं रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा है कि यही उचित समय है जब निर्दलीय उम्मीदवारों को लोकसभा चुनाव लडने से रोका जाए। याचिका में कहा गया है कि 2004 में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने केन्द्र से अनुरोध किया था कि कानून में संशोधन किया जाये कि कोई भी व्यक्ति चुनाव में एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से उम्मीदवार नहीं बन सकता।

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