संसद के शीतकालीन सत्र पर सस्पेंस बरकरार, रविशंकर प्रसाद बोले- इसके बारे में कैबिनेट समिति करेगी फैसला

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संसद के शीतकालीन सत्र को छोटा करने के सुझावों के बीच केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार (16 नवंबर) को कहा कि इस मसले पर कोई भी फैसला मंत्रिमण्डल की संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीपीए) ही करेगी।केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा किए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए प्रसाद ने संवाददाताओं से यह बात कही कि सत्र के कार्यक्रम के बारे में फैसला कैबिनेट की संसदीय मामलों की समिति तय करेगी।बता दें कि संसद का शीतकालीन सत्र कब शुरू होगा इसको लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है। आम तौर पर शीतकालीन सत्र नवंबर के तीसरे हफ्ते में शुरू हो जाता है। पिछले साल ये सत्र 16 नवंबर से शुरू होकर 16 दिसंबर तक चला था। लेकिन इस बार दो राज्यों (गुजरात और हिमाचल प्रदेश) में चुनावी घमासान की वजह से शीतकालीन सत्र को लेकर सरकार ने खामोशी ओढ़ रखी है।

न्यूज एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक शीतकालीन सत्र को लेकर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि, ‘‘(संसदीय मामलों के मंत्री) अनंत कुमार उनके (कैबिनेट की संसदीय मामलों की समिति के सदस्यों) के साथ संपर्क में हैं…यदि मंत्री लोगों से संपर्क करते हैं तो इसमें समस्या क्या है। नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्री संभ्रातवादी नहीं हैं जो केवल ट्वीट करें।’’

उन्होंने यह बात इस सवाल पर कही कि क्या संसद का शीतकालीन सत्र गुजरात चुनाव में घर-घर जाकर संपर्क करने के प्रधानमंत्री एवं अन्य मंत्रियों के व्यस्त कार्यक्रम की भेंट चढ़ जाएगा। वहीं, अयोध्या विवाद के समाधान के बारे में श्री श्री रविशंकर द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि श्री श्री रविशंकर की विषय वस्तु को कानून मंत्री रविशंकर के पास भेजा जाना चाहिए।

इसके अलावा नेशनल कांफ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के बारे में दिए गए विवादास्पद बयान के बारे में सवाल किए जाने पर उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को याद दिलाया कि संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा था कि पाक अधिकृत कश्मीर सहित पूरा कश्मीर भारत का अंग है तथा यह निर्णय संसद के हर सदस्य पर लागू होता है। अब्दुल्ला लोकसभा सदस्य हैं।

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