फ्रांस की अदालत ने बुरकीनी पर लगी रोक हटाई, ड्रेस पहनने को बताया मूलभूत अधिकार

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इस्लामिक बिकिनी के रूप में मशहूर बुर्कीनी पर फ्रांस के शहर विलनव लूबे में लगे प्रतिबंध को देश की एक शीर्ष अदालत ने गैरकानूनी करार देते हुए ख़ारिज कर दिया है।

अदालत के फैसले पर फ्रांस के प्रधानमंत्री मैनुएल वाल्स ने आगे कहा, फ्रांस में आधुनिक , धर्मनिरपेक्ष इस्लाम की जरूरत है और बुरकीनी पहनने का विचार उस सोच के साथ भिड़ गया है।
मैनुएल वाल्स ने आगे कहा, ‘इस पर बहस अभी खत्म नहीं हुई है। ये ड्रेस कट्टर इस्लामवाद और पिछड़ापन का प्रतीक है।’

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नीस में इस्लामी कट्टरपंथी हमले में 86 लोगों के मारे जाने के बाद करीब 30 नगरपालिकाओं ने समुंद्री तटों पर बुरकीनी पहनकर नहाने पर रोक लगा दी थी। पिछले कई दिनों से  इसके खिलाफ पूरी दुनिया में फ्रांसीसी दूतावासों के सामने प्रदर्शन हो रहे थे।

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अदालत ने कहा, ‘विलनव लूबे में बुर्किनी पर लगी रोक व्यक्तिगत आजादी, विचारों की स्वतंत्रता और कहीं भी आने-जाने के अधिकार का गंभीर और साफ तौर पर उल्लंघन है।’ अदालत ने आगे कहा, ये धर्म मानने या न मानने के अधिकार का भी हनन करती है इसलिए गैरकानूनी है।’
गौरतलब है कि फ्रांस के कई शहरों में बुर्कीनी पर प्रतिबंध को मानवाधिकार संगठनों ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकार का उल्लंघन बताकर इसके खिलाफ अपील की थी। बुर्कीनी को लेकर फ्रांस और अन्य देशों में जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है।

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अदालत के इस फैसले का उन सभी शहरों पर असर होगा जिन्होंने बुरकिनी पर रोक लगाई है। ज्यादातर रोक देश के दक्षिण पूर्वी हिस्से में लगाई गई है जहां अति दक्षिणपंथी विचार के लोग ताकतवर हैं। इस इलाके से होकर ही ज्यादातर शरणार्थी आते हैं और यहां बहुत से आप्रवासी रहते हैं।

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