लापरवाही: बिरयानी में छिपकली मिलने के बाद अब संपर्क क्रांति में परोसे गए पकौड़े में मिला ‘कीड़ा’

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ट्रेनों में यात्रियों को परोसे जा रहे खाने की गुणवत्ता को सुधारने की तमाम कोशिशों और दावों के बावजूद जमीन स्तर पर बदलाव नजर नहीं आ रहा है। कैग की फटकार के बाद भी खाने को लेकर शिकायतें का दौर जारी है। पिछले दिनों पूर्वा एक्सप्रेस में परोसी गई बिरयानी में छिपकली मिलने की घटना को अभी दो सप्ताह भी नहीं हुए हैं कि शनिवार(5 अगस्त) को बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के यात्री ने पकोड़े में कीड़े मिलने की शिकायत की है।

(HT PHOTO)

हिंदुस्तान अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद अली नामक यात्री ने बताया कि वह 2 अगस्त को परिवार के साथ छपरा से दरभंगा-नई दिल्ली बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के एस-9 कोच में सवार हुए। उन्होंने कहा कि मैंने पेंट्री कर्मी से 30 रुपये का पकोड़ा खरीदा।

यात्री के मुताबिक, चार साल के बेटे ने कुछ हिस्सा तोड़ कर खाया तभी पकोड़े में कीड़ा नजर आया, जिसकी शिकायत उन्होंने पेंट्री के प्रबंधक के साथ-साथ ट्विटर के जरिये रेल मंत्रलय से भी की। जिसके बाद पेंट्री कार प्रबंधक ने इस गलती के लिए तत्काल माफी मांगी।

अली ने बताया कि ट्वीट पर भी रेलवे ने तत्काल संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके बाद कई स्टेशनों पर रेलवे के अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर पूरी स्थिति की जानकारी ली। कानपुर और लखनऊ स्टेशनों पर अधिकारियों ने उनका मोबाइल नंबर लिया और कई कागजों पर दस्तखत कराए।

यात्री ने बताया कि लखनऊ में एक चिकित्सक भी कोच में आकर उनके बेटे का स्वास्थ्य परीक्षण किया। बता दें कि इससे पहले 26 जुलाई को पूर्वा एक्सप्रेस में भी ट्रेन की पेंट्री की ओर से परोसी गई बिरयानी में छिपकली मिलने की शिकायत मिली थी। इसके बाद रेलवे ने संबंधित ठेकेदार का ठेका रद्द करते हुए पांच साल के लिए उसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया था।

कैग भी उठा चुका है सवाल

रेलवे में खान-पान को लेकर संसद में पेश रिपोर्ट में भी रेलवे में परोसे जा रहे खाने की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने रेलवे की खानपान सेवाओं की पोल खोलते हुए कहा कि रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में परोसे जाने वाला खाना यात्रियों के खाने योग्य नहीं है।

संसद में पेश कैग की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि खाना कई जगहों पर खराब मिला। सामान आदमी के खाने लायक नहीं थे। खाने का सामान भी दूषित मिला। कहीं-कहीं एक्सपायरी के बाद का सामान मिला। यही नहीं, नलके के गंदे पानी का खाना पकाने में इस्तेमाल हुआ। मक्खी और धूल से बचाने के लिए खाना ढंका हुआ भी नहीं मिला और ट्रेनों में तिलचट्टे और चूहे मिले।

 

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