BSP विधायक का सनसनीखेज दावा- ‘कमलनाथ की सरकार गिराने के लिए BJP दे रही मंत्री पद और 50-60 करोड़ रुपये का ऑफर’

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लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की करारी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हमलावर होने पर राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किसी भी विषम परिस्थिति से निपटने के लिए एक नायाब फार्मूला निकाला है। इसके तहत एक-एक मंत्री को जिम्मेदारी दी गई है कि वह पांच-पांच विधायकों को संभाले और उसकी शिकायतों और समस्याओं पर गौर करे, ताकि विधायकों में किसी तरह का असंतोष न पनपे।

दरअसल, कई विधायक भाजपा की ओर से प्रलोभन मिलने के आरोप भी लगा चुके हैं। दमोह जिले की पथरिया विधानसभा सीट से बसपा विधायक राम बाई ने सोमवार को सनसनीखेज आरोप लगाया कि उन्हें भाजपा की ओर से 50 करोड़ रुपये और मंत्री पद की पेशकश की गई है, लेकिन वह कमलनाथ सरकार के साथ हैं।

हालांकि, राज्य में कांग्रेस सरकार गिरने की अटकलों के बीच जहां भाजपा ने इससे किनारा किया है, वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सभी मंत्रियों को सावधान रहने को कहा है। इस बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की विधायक ने भाजपा पर कांग्रेस की सरकार गिराने के लिए मंत्री पद और 50-60 करोड़ रुपये का लालच देने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस को समर्थन दे रही बसपा की विधायक रमाबाई ने कहा, ‘भाजपा सभी को ऑफर दे रही है। जो बेवकूफ होगा, वही उनके झांसे में आएगा। मेरे पास भी फोन आते हैं और मुझे मंत्री पद के साथ-साथ 50-60 करोड़ रुपये का ऑफर दिया जा रहा है। वे (भाजपा) ऐसे ऑफर सभी को दे रहे हैं।’

हालांकि, मध्य प्रदेश में भाजपा द्वारा अगली सरकार बनाए जाने की अटकलों का खंडन करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘भाजपा किसी प्रकार की तोड़फोड़ और खरीद-फरोख्त में विश्वास नहीं रखती है। हम ऐसा नहीं करेंगे, लेकिन कांग्रेस के अंतर्विरोध और जिन्होंने उनको समर्थन दिया है, उन्हीं के कुछ कारणों से कुछ भी हो सकता है।’

बता दें कि राज्य में मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से चल रही है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार मिलने के बाद सरकार के अस्थिर होने के कयास लगाए जाने लगे हैं। खबर थी कि कांग्रेस के कुछ विधायक भाजपा के संपर्क में हैं।

230 सदस्यीय राज्य विधानसभा में कांग्रेस के 114 और भाजपा के 109 विधायक हैं। कांग्रेस की सरकार बसपा के दो, सपा का एक और निर्दलीय चार विधायकों के समर्थन से बनी है। भाजपा की नजर निर्दलीय, बसपा और सपा के विधायकों पर है।

 

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