बॉम्बे हाई कोर्ट का निर्देश- सूचना और प्रसारण मंत्रालय RTI कार्यकर्ताओं की जानकारी वेबसाइट पर डालने के मामले की जांच करे, साकेत गोखले को 25,000 रुपये का करें भुगतान

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह यह जांच करे कि कैसे एक्टिविस्ट साकेत गोखले सहित आरटीआई कार्यकर्ताओं की निजी जानकारी उसकी वेबसाइट पर सार्वजनिक की गई। इसके साथ ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को साकेत गोखले को 25,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।

बॉम्बे हाई कोर्ट
साकेत गोखले

न्यायमूर्ति नितिन जामदार और न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की पीठ ने यह भी कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय गोखले की याचिका को अभिवेदन माने और तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करे। अदालत ने इसके साथ ही गोखले की याचिका का निपटारा कर दिया, लेकिन मंत्रालय द्वारा जांच शुरू नहीं करने पर हाई कोर्ट का दोबारा रुख करने की उन्हें आजादी दी।

अदालत ने मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह गोखले को मुकदमे पर आए खर्च के तौर पर 25 हजार रुपये का भुगतान करे। गोखले ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह मंत्रालय से 50 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाए। हालांकि, उच्च न्यायालय ने इस मामले को दीवानी अदालत पर छोड़ दिया।

उल्लेखनीय है कि, अदालत गोखले की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने अपनी निजी जानकारी मंत्रालय की वेबसाइट से हटवाने का अनुरोध किया था।

गोखले ने इस साल जुलाई में करना वायरस (कोविड-19) महामारी के मद्देनजर अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर के शिलांन्यास का विरोध करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसके बाद से उन्हें घृणा फोन कॉल आ रहे थे।

गोखले के मुताबिक, उनकी निजी जानकारी नवंबर 2019 में मंत्रालय की वेबसाइट पर डाली गई और जब उन्होंने इसके खिलाफ मंत्रालय को पत्र लिखा तो इस साल सितंबर में जानकारी हटाई गई। (इंपुट: भाषा के साथ)

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