बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा- सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर रिपब्लिक टीवी और टाइम्स नाउ की कुछ रिपोर्टिंग ‘प्रथम दृष्टया अवमानना’

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दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के केस से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने मीडिया को आत्महत्या से संबंधित मामलों में खबरें दिखाते वक्त संयम बरतने का निर्देश दिया है। इस मामले पर टिप्पणी करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि ऐसे मामलों में मीडिया ट्रायल के कारण न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप होता और अवरोध उत्पन्न होता है। हाई कोर्ट ने कहा है कि रिपब्लिक टीवी और टाइम्स नाउ द्वारा सुशांत सिंह राजपूत केस में मुंबई पुलिस को लेकर कुछ रिपोर्टिंग प्रथमदृष्टया अवमाननापूर्ण थी।

बॉम्बे हाई कोर्ट

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपांकर दत्त और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने कहा कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिपब्लिक टीवी और टाइम्स नाउ पर दिखाई गई कुछ खबरें ‘मानहानिकारक’ थीं। पीठ ने आगे कहा कि हालांकि उसने चैनलों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया है। पीठ ने 6 नवंबर को जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अदालत ने कहा कि किसी भी मीडिया प्रतिष्ठान द्वारा ऐसी खबरें दिखाना अदालत की मानहानि करने के बराबर माना जाएगा जिससे मामले की जांच में या उसमें न्याय देने में अवरोध उत्पन्न होता हो। पीठ ने कहा, ‘मीडिया ट्रायल के कारण न्याय देने में हस्तक्षेप एवं अवरोध उत्पन्न होते हैं तथा यह केबल टीवी नेटवर्क नियमन कानून के तहत कार्यक्रम संहिता का उल्लंघन भी करता है।’ अदालत ने कहा, ‘कोई भी खबर पत्रकारिता के मानकों एवं नैतिकता संबंधी नियमों के अनुरूप ही होनी चाहिए अन्यथा मीडिया घरानों को मानहानि संबंधी कार्रवाई का सामना करना होगा।’

हाई कोर्ट ने आत्महत्या के मामलों में खबर दिखाने को लेकर मीडिया घरानों के लिए कई दिशा-निर्देश भी जारी किए। अदालत में राजपूत के मौत की घटना की प्रेस खासकर टीवी समाचार चैनलों द्वारा खबर दिखाने पर रोक लगाने की मांग करने वाली अनेक जनहित याचिकाओं पर पीठ ने पिछले वर्ष छह नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

ये याचिकाएं वरिष्ठ अधिवक्ता अस्पी चिनॉय, कार्यकर्ताओं, अन्य नागरिकों और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों के समूह द्वारा दायर की गई थीं। इनमें यह मांग भी की गई थी कि समाचार चैनलों को सुशांत मामले में मीडिया ट्रायल करने से रोका जाए।

गौरतलब है कि, सुशांत सिंह राजपूत पिछले साल 14 जून को अपने मुंबई स्थित अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे। मुंबई पुलिस ने अपनी जांच में इसे आत्महत्या माना था। हालांकि, सुशांत के परिवार और बिहार सरकार की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने यह केस सीबीआई के हवाले कर दिया था। सीबीआई अभी मामले की जांच कर रही है और किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है। सुशांत के केस में सीबीआई के अलावा ड्रग्स के ऐंगल से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और मनी लॉन्ड्रिंग के ऐंगल से प्रवर्तन निदेशालय भी जांच कर रहे हैं।

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