सलमान खान द्वारा मना करने के बावजूद अनिल शर्मा ने हिमाचल की BJP सरकार से दिया इस्तीफा, अभिनेता ने पार्टी नेतृत्व से बात करने का दिया था आश्वासन

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हिमाचल प्रदेश के उर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने राज्य की बीजेपी सरकार के मंत्रिपरिषद से शुक्रवार (12 अप्रैल) को त्यागपत्र दे दिया। इससे कुछ ही दिन पहले कांग्रेस ने उनके बेटे आश्रय शर्मा को प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया था। शर्मा के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुख राम तथा आश्रय ने पिछले महीने बीजेपी छोड़ कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। इसके बाद से ही अनिल शर्मा पर बीजेपी का दवाब था।

हिमाचल की बीजेपी सरकार से इस्तीफा देने के बाद अनिल शर्मा ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू के दौरान बड़ा खुलासा किया है। अपने मोबाइल फोन के कुछ संदेश पीटीआई को दिखाते हुए अनिल शर्मा ने दावा किया, ‘‘बालीवुड अभिनेता सलमान खान ने मुझे हिमाचल के मंत्री पद पर बने रहने के लिए कहा है। सलमान ने कहा कि वह (बीजेपी के वरिष्ठ नेतृत्व से) बात करेंगे। हालांकि, मैने उनसे पूछा अगर आप मेरे स्थान पर होते तो आप क्या करते, आप परिवार के साथ खड़ा होते या नहीं।’’

इस पर सलमान खान ने कहा कि वह अपने परिवार के समर्थन में खड़े होते। बता दें कि अनिल शर्मा के बड़े बेटे आयूष शर्मा के साथ सलमान की बहन अर्पिता की शादी हुई है। दरअसल, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह जिला होने के कारण मंडी लोकसभा सीट उनके लिए नाक का विषय बन गया है। दूसरी ओर सुख राम की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है और वह अपने पोते की जीत में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

बीजेपी द्वारा दबाव बनाए जाने के बाद दिया इस्तीफा

अनिल शर्मा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यालय में त्यागपत्र भेजने के बाद पीटीआई को बताया, ‘‘मैने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया है क्योंकि मेरे विधानसभा क्षेत्र मंडी में मुख्यमंत्री ने कल एक जनसभा में कहा था कि ‘मेरे मंत्री (अनिल शर्मा) कहीं खो गए हैं, अगर उनके ठिकाने के बारे में किसी को पता है तो मुझे इससे अवगत कराएं।’’ शर्मा ने कहा कि ठाकुर के व्यंग्यात्मक टिप्पणियों के कारण ही वह मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र देने के लिए मजबूर हुए हैं, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री का उनमें अब भरोसा नहीं रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर मुख्यमंत्री का अपने मंत्री पर भरोसा नहीं रहता है तो केवल दो ही विकल्प बचते हैं, या तो मुख्यमंत्री को उसे स्वयं ही मंत्रिमंडल से निकाल देना चाहिए अथवा मंत्री को स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए। इसलिए मुझे लगा कि मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र दे देना ही बेहतर है।’’ प्रदेश में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शर्मा कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यद्यपि उन्होंने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया है लेकिन वह बीजेपी में बने हुए हैं। बीजेपी नेता ने इससे पहले कहा था कि वह तभी मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देंगे जब ठाकुर उन्हें कहेंगे।

बेटे के खिलाफ नहीं करेंगे प्रचार

बीजेपी को उम्मीद थी कि शर्मा मंडी से पार्टी उम्मीदवार राम स्वरूप शर्मा के पक्ष में प्रचार करेंगे, जो अनिल के बेटे के आश्रय के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं। लेकिन अनिल ने प्रचार करने से इंकार कर दिया और कहा कि वह इस मसले पर मंत्रिपरिषद भी छोड़ देंगे। कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने अनिल शर्मा से कहा है कि मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद वह कांग्रेस उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार करे। लेकिन अनिल ने कहा कि न तो वह अपने बेटे और कांग्रेस उम्मीदवार आश्रय के लिए और न ही बीजेपी प्रत्याशी राम स्वरूप के लिए प्रचार करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा आशीर्वाद मेरे बेटे आश्रय के साथ है। यह मतदाताओं के ऊपर है कि वह किसे अपना मत देकर विजयी बनाएंगे।’’ इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कहा, अगर राम स्वरूप शर्मा ने मंडी में काम किया है, तो सांसद को मुख्यमंत्री की मदद लेने की बजाय काम के आधार पर वोट मांगना चाहिए।

अनिल शर्मा ने कहा कि मंडी विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने उन्हें बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर चुना है। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मैं न तो बीजेपी से और न ही विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दूंगा। मैं बीजेपी विधायक के तौर बना रहूंगा और विधानसभा क्षेत्र के लिए काम करता रहूंगा।’’

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