“हम उत्तर प्रदेश में हारने वाले हैं, अब हमारे लिए सिर्फ राम मंदिर ही एक सहारा है”

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भाजपा के लिए के 2014 अच्छे दिनों की सौगात लेकर आया था और सबकी ज़ुबान पर अबकी बार मोदी सरकार का जुमला मानों रट गया था लेकिन जैसे जैसे साल बीतता गया पार्टी की चमक फीकी पड़ती गई। और पार्टी तबसे जनता को ऐसा संदेश नहीं दे सकी है कि लोग फिर ‘अबकी बार, भाजपा सरकार’ कहें।

और जैसे- जैसे उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तारीख नज़दीक आ रही है वैसे ही भाजपा के लिए घबराहट और बढ़ती जा रही है।

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2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने भारी बहुमत हासिल किया था वही अब 2014 की तुलना में पार्टी के कई बड़े नेताओं ने उत्तर प्रदेश में भाजपा के गिरते स्तर पर चिंता जाहिर की है।

अपने उग्र भाषणों के लिए मशहूर एक राज्यसभा सांसद ने जनता का रिपोर्टर से कहा, “उत्तर प्रदेश में हम मुश्किल में हैं लेकिन मुझे लगता है, हम हारने वाले हैं राम मंदिर का मुद्दा हमें बचा सकता है, ये मुद्दा जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आएगा जहां हमारी कानूनी टीम सुप्रीम कोर्ट से दिन के दिन सुनवाई की मांग करेगी, वोटरों को आकर्षित करने के लिए हमारा ये कदम ज़रूर काम करेगा।’

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जनता का रिर्पोटर और अन्य ओपिनियन पोल्स में भाजपा दूसरे स्थान पर ही रही है, वहीं भाजपा नेताओं को भी लगता है कि उन्हे उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के लिए बसपा की ज़रूरत पड़ेगी। ‘

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जनता का रिपोर्टर के अनुसार, उत्तर प्रदेश में भाजपा 135 से ज्यादा सीट नहीं जीतेगी।

पिछले हफ्ते भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की लखनऊ रैली में मात्रा 30,000- 35,000 लोग जमा हो सके थे जबकि रैली के इस स्थान में कम से कम पांच लाख लोगों के बैठने की जगह थी।

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