किसने ज्योतिरादित्य सिंधिया और BJP के बीच करा डाली इतनी बड़ी ‘डील’?, जानिए कौन है पर्दे के पीछे का वह शख्‍स

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मध्य प्रदेश की राजनीति में चल रहे सियासी उथल-पुथल के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार (11 मार्च) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सिंधिया खेमे के 22 कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा दे दिया जिससे प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली 15 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार गिरने के कगार पर पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक, सिंधिया 12 मार्च को अपने समर्थकों एवं कांग्रेस के कई विधायकों के साथ भाजपा का दामन थाम सकते हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच आखिर किस नेता ने ‘डील’ कराई? पर्दे के पीछे वह कौन था, जिसने भाजपा आलाकमान तक ज्योतिरदित्य सिंधिया की बात पहुंचाई? आखिरकार वह कौन है, जिस पर पार्टी हाईकमान इतना भरोसा करती है, जिसके भरोसे मध्य प्रदेश में भाजपा ने ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाया? इस तमाम सवालों से पर्दा अब हट गया है। समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्योतिरादित्य को भाजपा तक लाने और फिर गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाने वाले कोई और नहीं, बल्कि भाजपा प्रवक्ता जफर इस्लाम हैं।

भाजपा प्रवक्ता जफर इस्लाम मीडिया के लिए जाना पहचाना चेहरा हैं। टीवी चैनलों पर डिबेट में वह हर रोज भाजपा का बचाव करते हैं। राजनीति में आने से पहले जफर इस्लाम एक विदेशी बैंक के लिए काम करते थे और लाखों रुपये का वेतन पाते थे। मोदी की राजनीति से प्रभावित होकर जफर इस्लाम ने भाजपा से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की। माना जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जफर इस्लाम के अच्छे ताल्लुकात हैं। शायद यही वजह है कि मृदुभाषी और बेहद शालीन व्यक्तित्व के धनी जफर इस्लाम को भाजपा हाईकमान ने इतना बड़ा ऑपरेशन चलाने की जिम्मेदारी दी।

जफर कांग्रेस के बागी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को पहले से जानते रहे हैं। सिंधिया जब कभी दिल्ली में रहते थे, तो उनसे जफर की मुलाकात अक्सर हो जाया करती थी। लेकिन जफर पिछले पांच माह से ज्योतिरदित्य को भाजपा में लाने के सिलसिले में उनसे मिल रहे थे।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, हाल ही के समय में ज्योतिरदित्य और जफर की लगातार पांच बैठकें हुई थीं। खुद ज्योतिरदित्य सिंधिया ने अपनी तरफ से पेशकश की थी। इस पेशकश को जफर इस्लाम ने ही पार्टी आलाकमान तक पहुंचाया। इसके बाद ज्योतिरादित्य को भाजपा में लाने की कवायद और मध्य प्रदेश में ‘ऑपरेशन लोटस’ की पटकथा लिखी गई। इस पूरे ऑपरेशन में भाजपा की तरफ से सिर्फ लॉजिस्टिक और अन्य सहायता दी गई। पूरा ऑपरेशन ज्योतिरादित्य के मुताबिक ही चला।

यहां तक कि सोमवार और मंगलवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के वक्त भी जफर 7, लोक कल्याण मार्ग पर मौजूद थे। मंगलवार को जब गृह मंत्री अमित शाह ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर प्रधानमंत्री आवास पहुंचे थे तो उस समय भी जफर इस्लाम गृह मंत्री अमित शाह की गाड़ी में मौजूद थे।

गौरतलब है कि, मध्य प्रदेश की राजनीति में चल रहे सियासी उथल-पुथल के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सिंधिया खेमे के 22 कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा दे दिया जिससे प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली 15 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार गिरने के कगार पर पहुंच गई है।

कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मंगलवार को पार्टी छोड़ने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने लोगों के साथ विश्वासघात किया और ‘‘व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा’’ को विचारधारा से ऊपर रखा। सिंधिया पर हमला बोलते हुए, कई कांग्रेस नेताओं ने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ 1857 के विद्रोह और सिंधिया राजघरानों की भूमिका का जिक्र किया और साथ ही 1967 में विजया राजे सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने का भी हवाला दिया।

गौरतलब है कि, मध्य प्रदेश विधानसभा में 230 सीटें हैं, जिनमें से दो सीटें फिलहाल खाली हैं। इस प्रकार वर्तमान में प्रदेश में कुल 228 विधायक हैं, जिनमें से 114 कांग्रेस, 107 भाजपा, चार निर्दलीय, दो बहुजन समाज पार्टी एवं एक समाजवादी पार्टी का विधायक शामिल हैं। अगर 22 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिये जाते हैं तो विधानसभा में सदस्यों की प्रभावी संख्या महज 206 रह जाएगी। उस स्थिति में बहुमत के लिये जादुई आंकड़ा सिर्फ 104 का रह जाएगा। ऐसे में, कांग्रेस के पास सिर्फ 92 विधायक रह जाएंगे, जबकि भाजपा के 107 विधायक हैं। कांग्रेस को चार निर्दलीयों, बसपा के दो और सपा के एक विधायक का समर्थन हासिल है। उनके समर्थन के बावजूद कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से दूर हो जाएगी।

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