जीत के लिए सफल बिसात बिछाने मे माहिर अमित शाह को मोदी मंत्रिमंडल में मिल सकता है यह मंत्रालय, जानें उनके जीवन से जुड़े कुछ अनछुए पहलू

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लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरे कार्यकाल के लिए आज यानी गुरुवार (30 मई) को नए मंत्रिपरिषद के साथ शपथ लेंगे। दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की थपथ लेने जा रहे मोदी की कैबिनेट में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी शामिल होंगे। अमित शाह के मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने की पुष्टि हो गई है। गुजरात भाजपा अध्यक्ष जीतू वाघाणी ने ट्वीट कर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को बधाई भी दे दी है।

Reuters File Photo

इससे साफ हो गया है कि मोदी सरकार 2.0 में शाह की एंट्री होगी और किसी दूसरे बड़े नेता को पार्टी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। शाम करीब साढ़े चार बजे गुजरात भाजपा के अध्यक्ष जीतू वाघाणी ने दो तस्वीरें शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल में मजबूत साथी के रूप में शामिल होने पर हमारे पथ प्रदर्शक एवं मार्गदर्शक श्रद्धेय अमित शाह से शुभेच्छा मुलाकात की और शुभकामनाएं दी।’

इसको लेकर रहस्य बना हुआ है कि चार प्रमुख प्रभार गृह, वित्त, रक्षा और विदेश किसे मिलेंगे। वित्त मंत्री अरुण जेटली के स्वास्थ्य आधार पर मंत्री नहीं बनने के फैसले के बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि जेटली के स्थान पर किन्हें यह महत्वपूर्ण विभाग मिलेगा। इस पद के लिए रेल मंत्री पीयूष गोयल को प्रमुख दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसी चर्चा भी है कि शाह जो गांधीनगर से लोकसभा के लिए चुने गए हैं, मोदी कैबिनेट में उन्हें चार प्रमुख विभागों वित्त, गृह, रक्षा या विदेश में से कोई एक मिल सकता है। भाजपा ने सरकार के संभावित सदस्यों के बारे में कोई भी आधिकारिक बयान देने से परहेज किया है और पार्टी नेताओं ने जोर दिया कि यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। शाह को भाजपा की रणनीति बनाने का श्रेय दिया जाता है।

पार्टी की जीत के लिए सफल बिसात बिछाने मे माहिर

भाजपा की प्रचंड जीत के साथ किसी गैर कांग्रेस सरकार को लगातार दूसरी बार केंद्र की सत्ता में लाने के सूत्रधारों मे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी शामिल हैं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने दिखा दिया है कि वह बूथ से लेकर चुनाव मैदान तक प्रबंधन और प्रचार की ऐसी सधी हुई बिसात बिछाते हैं कि मंझे से मंझे राजनीतिक खिलाड़ी भी अक्सर मात खा जाते हैं। शतरंज खेलने से लेकर क्रिकेट देखने एवं संगीत में गहरी रुचि रखने वाले अमित शाह को राजनीति का माहिर रणनीतिकार माना जाता है।

अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई के एक गुजराती परिवार में हुआ था। 54 वर्षीय शाह को राज्य दर राज्य भाजपा की सफलता गाथा लिखने का सूत्रधार माना जाता है। वर्तमान लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और दक्षिण भारत में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन के लिए उनकी सफल रणनीति को श्रेय दिया जा रहा है। शाह ने ‘पंचायत से लेकर संसद’ तक बीजेपी को सत्ता में लाने के सपने को साकार करने की दिशा में प्रतिबद्ध पहल की।

विधायक से BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर 

अमित शाह ने पहली बार सरखेज से वर्ष 1997 के विधानसभा उपचुनाव में किस्मत आजमाई और तब से 2012 तक लगातार पांच बार वहां से विधायक चुने गए। सरखेज की जीत ने उन्हें गुजरात में युवा और तेजतर्रार नेता के रूप में स्थापित किया। उस जीत के बाद वह भाजपा में लगातार सीढ़ियां चढ़ते गए। मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद शाह और अधिक मजबूती से उभरे। वर्ष 2003 से 2010 तक गुजरात सरकार की कैबिनेट में उन्होंने गृह मंत्रालय का जिम्मा संभाला।

हालांकि, उन्हें इस बीच कई सियासी उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ा, लेकिन जब नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय राजनीतिक पटल पर लाया गया तो उनके सबसे करीबी माने जाने वाले अमित शाह को भी पूरे देश में बीजेपी के प्रचार प्रसार में शामिल किया गया। उनके करीबी बताते हैं कि पारिवारिक और सामाजिक मेल-मिलाप में वह बहुत कम वक्त जाया करते हैं। शाह को कार्यकर्ताओं की अच्छी परख है और वह संगठन और प्रबंधन के माहिर खिलाड़ी हैं।

लालकृष्ण आडवाणी का संभाला चुनाव प्रबंधन

चुनाव प्रबंधन के खिलाड़ी शाह ने पहली बार 1991 के लोकसभा चुनाव में गांधीनगर में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का चुनाव प्रबंधन संभाला था। लेकिन उनके बूथ प्रबंधन का करिश्मा 1995 के उपचुनाव में तब नजर आया, जब साबरमती विधानसभा सीट पर तत्कालीन उप मुख्यमंत्री नरहरि अमीन के खिलाफ चुनाव लड़ रहे अधिवक्ता यतिन ओझा का चुनाव प्रबंधन उन्हें सौंपा गया। खुद यतिन कहते हैं कि शाह को राजनीति के सिवा और कुछ नहीं दिखता।

साहिर और कैफी की शायरी के मुरीद

अमित शाह के राजनीतिक सफर पर किताब लिखने वाले अनिर्बान गांगुली व शिवानंद द्विवेदी के मुताबिक वह कैफी आजमी और साहिर लुधियानवी की शायरी के मुरीद हैं। इसके अलावा उन्हें खाने-पीने का भी शौक है, खासकर पकौड़े उन्हें बेहद पसंद हैं। शाह को ज्योतिष और आध्यात्म में भी गहरी रुचि है। वे नियमित रूप से डायरी भी लिखते हैं। (इनपुट- पीटीआई के साथ)

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