बुलंदशहर हिंसा: गांववालों ने BJP विधायक को तीन घंटे तक बनाए रखा बंधक, जानें- क्या है पूरा मामला? वीडियो वायरल

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उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 3 दिसंबर को हुई भीड़ की हिंसा में मारे गए युवक सुमित के परिजनों और ग्रामीणों का पुलिस-प्रशासन के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा। छात्र सुमित के घर पर शनिवार को पुलिस के खिलाफ हुई पंचायत में राज्य में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक देवेंद्र सिंह लोधी को बुलाकर उन्हें बंधक बना लिया। ग्रामीणों ने विधायक का घेराव कर उन्हें करीब ढाई से तीन घंटे तक बंधक बनाए रखा।

इस दौरान ग्रामीणों ने पंचायतकर स्याना के बीजेपी विधायक देवेंद्र सिंह लोधी को तीन घंटे तक बंधकर बनाकर रखा। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से केंद्रीय जांच एजेंसी यानी सीबीआई जांच एवं निर्दोष ग्रामीणों की गिरफ्तारी न करने की मांग की। विधायक द्वारा आश्वसान देने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण सुमित के भाई को नौकरी, परिजनों को आर्थिक मदद और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग रहे थे। पंचायत में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस निर्दोष युवकों को गिरफ्तार कर जबरन जेल में भेज रही है। इस दौरान ग्रामीणों के बीच बैठे विधायक ने कहा कि वो उनकी समस्या को राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखेंगे। सिंह के इस आश्वासन के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

विधायक ने खुद किया खुलासा 

स्याना से विधायक देवेंद्र सिंह लोधी का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने बताया कि बुलंदशहर हिंसा मामले में निर्दोष लोगों को किसी भी कीमत पर जेल में नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गांव में स्थानीय लोगों ने उन्हें करीब तीन घंटे तक बिठाए रखा। विधायक के मुताबिक वह करीब दो बजे ग्रामीणों के पास पहुंचे और शाम पांच बजे उन्हें छोड़ा गया।

क्या है पूरा मामला?

हिंदुस्तान में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को चिंगरावठी में हिंसा में मारे गए सुमित के घर पर पंचायत हुई। पंचायत में सुमित के पिता अमरजीत सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस ने दबाव देकर एक व्यक्ति को चश्मदीद गवाह बताकर उससे झूठा बयान दिलवाया है। उनका बेटा सुमित हिंसा में नहीं था। उस व्यक्ति पर दबाव बनाकर बयान दिलाया जा रहा है कि उसके सामने प्रशांत नट ने इंस्पेक्टर को गोली मारी।

उन्होंने कहा कि पुलिस लगातार कहानी बदल रही है। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार ने आत्मरक्षा में नहीं, बल्कि उनेके बेटे की गोली मारकर हत्या की है। अमरजीत सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस जिस गवाह को घटना स्थल के पास का चाय बेचने वाला बता रही है, वह पड़ोस के गांव का किसान है। सिंह ने बताया कि पुलिस के फर्जी गवाह तैयार किए जाने की शिकायत मुख्यमंत्री को ईमेल भेजकर की गई है।

पंचायत में उपस्थित ग्रामीणों ने कहा कि हिंसा के चश्मदीद गवाह कोतवाल का ड्राईवर, हमराह व मौके पर मौजूद होमगार्ड से पूछताछ क्यों नहीं हो रही है। पंचायत में मौजूद प्रशांत नट की चाची मुनेश देवी व मौसी रसमी देवी ने बताया कि प्रशांत नट को 25 दिसंबर को ग्रेटर नोएडा के कासना में रिश्तेदारों ने पुलिस के हवाले किया था। आरोप लगाया कि पुलिस झूठे गवाहों से प्रशांत पर कोतवाल की हत्या करने का आरोप लगवा रही है।

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