दिल्ली की तरह अगर विधायकों पर कार्यवाही होती है तो कभी भी गिर सकती है छत्तीसगढ़ की BJP सरकार

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राजधानी दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) शासित राज्य छत्तीसगढ़ और हरियाणा में हलचल तेज हो गई है। दिल्ली में आप के 20 विधायकों की तरह अगर छत्तीसगढ़ सरकार के विधायकों पर कार्यवाही होती है तो राज्य में बीजेपी को बड़ा झटका लग सकता है।

दिल्ली
file photo

न्यूज़ 18 हिंदी की ख़बर के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में भी 11 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया गया है और इनके खिलाफ हाई कोर्ट में सुनवाई चल रहीं है जो अंतिम दौर पर है। 90 विधानसभा सीट वाले छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी दल बीजेपी के पास 49 विधायक हैं।

इनमें से 11 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया गया है। अगर राजधानी दिल्ली वाली स्थिति छत्तीसगढ़ में बनती है होती तो यहां सरकार पर संवैधानिक संकट आ जाएगा।

न्यूज़ 18 हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा नहीं हैं कि सरकार ने केवल इन्ही 11 विधायकों को मलाईदार पर दिया हो। इनके अवाला भी आधा दर्जन विधायकों को निगम-मंडलों का प्रमुख बनाया गया है, इनको लेकर भी विपक्ष सवाल खड़े करता रहा है।

यदि कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में संसदीय सचिवों की नियुक्ति अवैध मानकर उनकी विधान सभा सदस्यता खत्म कर दिया तो बीजेपी के हाथ से छत्‍तीसगढ़ फिसल सकता है।

बता दें कि, राजधानी दिल्ली में 20 विधायकों के सदस्यता खत्म करने के बाद भी सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार तो बच गई। अगर दिल्ली वाली स्थिति छत्तीसगढ़ में बनती है होती तो यहां सरकार पर संवैधानिक संकट आ जाएगा।

वहीं, दूसरी ओर दिल्ली में आप के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद हरियाणा में भी बीजेपी के 4 विधायकों की सदस्यता सवालों के घेरे में है। जगमोहन भट्टी नाम के एक वकील ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बीजेपी विधायक कमल गुप्ता, बख्शीश सिंह विर्क, सीमा त्रिखा और श्याम सिंह राणा की सदस्यता रद्द करने की मांग की है।

न्यूज़ 18 हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक, चारों विधायक इससे पहले मुख्य संसदीय सचिव रह चुके हैं। 5 जुलाई 2017 को हाइकोर्ट के आदेश के बाद इन चारों को संसदीय सचिव का पद छोड़ना पड़ा था। वहीं याचिकाकर्ता वकील जगमोहन भट्टी का कहना है कि जिस तरह दिल्ली में आप विधायकों की सदस्यता रद्द की गई, वैसे ही बीजेपी के इन 4 विधायकों की सदस्यता भी रद्द की जाए।

बता दें कि, दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। लाभ के पद मामले में पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द हो गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार (21 जनवरी) को चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूरी दे दी। चुनाव आयोग ने शुक्रवार (19 जनवरी) को लाभ के पद मामले में इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश की थी।

ये सभी विधायक 13 मार्च, 2015 से 8 सितंबर, 2016 तक संसदीय सचिव पद पर थे, जिसे ‘लाभ का पद’ माना गया है। हालांकि, इस फैसले से केजरीवाल सरकार पर खतरा नहीं हैं। विधि मंत्रलय द्वारा जारी अधिसूचना में राष्ट्रपति के हवाले से कहा गया कि चुनाव आयोग की सिफारिश पर दिल्ली विधानसभा के 20 सदस्यों को अयोग्य करार दिया गया है।

विधि मंत्रलय द्वारा जारी अधिसूचना में राष्ट्रपति के हवाले से कहा गया कि चुनाव आयोग की सिफारिश पर दिल्ली विधानसभा के 20 सदस्यों को अयोग्य करार दिया गया है। अधिसूचना में कहा गया कि निर्वाचन आयोग द्वारा व्यक्त की गई राय के आलोक में, मैं, रामनाथ कोविंद, भारत का राष्ट्रपति, अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उक्त 20 सदस्यों को दिल्ली विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहराता हूं।

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