अन्य राष्ट्रीय पार्टियों के मुकाबले बीजेपी को मिला 12 गुना ज्यादा चंदा

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केन्द्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को पिछले वित्त वर्ष में अन्य राष्ट्रीय पार्टियों के मुकाबले 12 गुना ज्यादा यानि 437 करोड़ रूपये से अधिक राजनीतिक चंदा मिला। बुधवार को चुनाव से जुड़े एक विचार मंच द्वारा जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है।

बीजेपी
file photo

बीजेपी और कांग्रेस को सबसे अधिक चंदा ‘‘प्रूडेंट इलैक्टोरल ट्रस्ट ’’ की ओर से मिला। यह बड़े कारपोरेट घरानों द्वारा समर्थित कंपनी है जिसमें परिसंपत्ति और टेलीकाम सेक्टर से जुड़ी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। एसोसिएशन फोर डेमोक्रेटिक रिफोर्म्स (एडीआर) ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रूडेंट इलैक्टोरल ट्रस्ट ने बीजेपी और कांग्रेस को मिलाकर कुल 164.30 करोड़ रूपये का चंदा दिया। इसमें से बीजेपी को 154.30 करोड़ मिला जो कि उसे मिले कुल चंदे का 35 फीसदी है। कांग्रेस के हिस्से में दस करोड़ रूपया आया जो कि उसे मिले कुल धन का 38 फीसदी है। राष्ट्रीय दलों द्वारा घोषित 20 हजार रूपये से अधिक के चंदे में वर्ष 2017.18 के लिए राष्ट्रीय दलों ने 469.89 करोड़ रूपया मिलने की घोषणा की है। इसमें से ज्यादातर हिस्सा 437.04 करोड़ रूपया बीजेपी के खाते में गया जबकि कांग्रेस को 26.65 करोड़ रूपया मिला।

एडीआर ने एक बयान में बताया, ‘बीजेपी ने अपने जिस चंदे की घोषणा की है वह कांग्रेस, राकांपा, भाकपा, माकपा और तृणमूल कांग्रेस द्वारा इसी अवधि में घोषित कुल चंदे से 12 गुना अधिक है।’ बयान में बताया गया है कि राष्ट्रीय दलों को करीब 90 फीसदी चंदा कोरपोरेट घरानों से और बाकी 10 फीसदी लोगों से मिला। कोरपोरेट घरानों और कारोबारियों ने साल 2017.18 में बीजेपी को 400.23 करोड़ रूपये राजनीतिक चंदे के रूप में दिए जबकि कांग्रेस को केवल 19.29 करोड़ रूपया ही मिला।

इस बीच, बहुजन समाज पार्टी ने ऐलान किया है कि इस अवधि में उसे 20 हजार रूपये से अधिक कोई चंदा नहीं मिला। बसपा पिछले 12 साल से हर साल यही घोषणा करती आ रही है। दिल्ली स्थित विचार मंच ने यह जानकारी दी है।

दलों को मिले राजनीतिक चंदे में से दिल्ली से पार्टियों को 208. 56 करोड़ रूपया मिला तो वहीं महाराष्ट्र से 71.93 करोड़ और गुजरात से 44.02 करोड़ रूपया मिला। एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कुल चंदे में से 42.60 करोड़ रूपये यानि करीब 9.07 फीसदी राशि का अधूरी सूचना के कारण, पता नहीं चल सका कि यह किस राज्य से आया है।

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