BJP ने तीन तलाक विधेयक पर कांग्रेस को बताया ‘confused’ विपक्ष ने की Select समिति में भेजे जाने की मांग

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तीन तलाक बिल को लेकर सरकार की मुश्किलें कम नहीं हो रही है। लोकसभा में बिल को मंजूरी मिल गई है लेकिन राज्‍यसभा में बिल को पास कराना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौति साबित हो रहा है। इस मामले में अब सबकी निगाह विपक्षी पार्टी कांग्रेस के रुख पर निर्भर कर रही हैं। जबकि लेफ्ट का कहना है कि BJP राजनीतिक फायदे के लिए जल्दबाजी में इस बिल को लेकर आई है और उसका मकसद सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना है।

तीन तलाक

मंगलवार को तीन तलाक बिल पर CPI नेता डी राजा ने भी ट्रिपल तलाक बिल को राज्यसभा की प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग की। उधर, शरद पवार की पार्टी NCP ने भी बिल को राज्यसभा की सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की है। पार्टी सांसद माजिद मेमन ने यह मांग रखी। NCP नेता मजीद मेमन ने कहा कि पार्टी ने पहले ही स्‍पष्‍ट कर दिया है कि हम पूरी तरह से अपराधीकरण के खिलाफ हैं।

इस बीच, केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने मंगलवार को ट्रिपल तलाक विधेयक पर कहा कि कांग्रेस ट्रिपल तलाक बिल पर ‘कन्फ्यूज’ है। नकवी ने कहा- मुस्लिम महिलाएं इस बिल को लेकर खुश हैं तो फिर कांग्रेस दुखी क्यों है? कांग्रेस एक कदम आगे जाती और फिर 10 कदम पीछे हट जाती है।

‘245 सदस्यीय राज्यसभा में निर्दलीय और मनोनीत सदस्यों को छोड़कर 28 राजनीतिक पार्टियां हैं, जिनके सदस्य हैं। तृणमूल कांग्रेस के 12, समाजवादी पार्टी के 18, तमिलनाडु की एआईएडीएमके के पास 13, सीपीएम के 7, सीपीआईए के 1, डीएमके के 4, एनसीपी के 5, पीडीपी के 2, हरियाणा के इंडियन नेशनल लोकदल के 1, शिवसेना के 3, तेलगुदेशम के 6, टीआरएस के 3, वाएसआर के 1, अकाली दल के 3, आरजेडी के 3, आरपीआई के 1, जनता दल (एस) के 1, केरल कांग्रेस के 1, नगा पीपुल्स फ्रंट के 1 और एसडीएफ का 1 सांसद हैं। इसके अलावा 8 मनोनीत और 6 निर्दलीय सदस्य हैं।

इस बिल में प्रावधान है कि अगर कोई ट्रिपल तलाक का दोषी पाया जाता है तो 3 साल की सजा का प्रावधान है।

 

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