सेना प्रमुख बिपिन रावत के बयान पर बवाल, ओवैसी ने राजनीतिक मसलों से दूर रहने की दी नसीहत

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सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत द्वारा असम की एक राजनीतिक पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) पर दिए गए एक बयान को लेकर बवाल मच गया है। असम में एक सेमीनार में शिरकत करने पहुंचे सेना प्रमुख ने उत्तर पूर्व में आबादी की रफ्तार (जिसे बदला नहीं जा सकता) को रेखांकित करते हुए बुधवार (21 फरवरी) को चेताया कि मौलाना बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) का विस्तार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से भी तेजी से हुआ है।

File Photo: PTI

जनरल रावत के बयान पर अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। औवैसी ने कहा है कि राजनीतिक दलों पर टिप्पणी करना सेना प्रमुख का काम नहीं है। ओवैसी ने हैरानी जताते हुए आखिर क्यों सेना प्रमुख राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पार्टी के गठन और विस्तार की इजाजत है।

दरअसल, जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल रावत ‘भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में खाई भरने और सीमा को सुरक्षित रखने’ के विषय पर आयोजित सेमीनार में बुधवार को बोल रहे थे। इस दौरान जनरल रावत ने कहा कि, ”मैं नहीं समझता हूं कि आप इस इलाके की आबादी की रफ्तार को बदल सकते हैं। अगर यह पांच जिलों से आठ और नौ जिलों तक पहुंच गई तो इसके पीछे वजह किसी भी सरकार के रहते लोगों के आने-जाने की दर रही।”

सेना प्रमख ने 1984 में बीजेपी के महज दो सीटें जीतने का जिक्र करते हुए कहा कि, ”एक पार्टी है एआईयूडीएफ, अगर आप देखें तो बीजेपी का इतने वर्षों में जितना विस्तार हुआ, उसके मुकाबले एआईयूडीएफ का तेजी से विस्तार हुआ। जब हम जनसंघ की बात करते हैं और कहते हैं इसे दो सांसदों से वे कहां पहुंच गए तो हमें यह भी देखना चाहिए कि एआईयूडीएफ असम में तेजी आगे बढ़ रही है। आखिरकार हमें यह देखना होगा कि असम कैसा राज्य होगा।”

एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बिपिन रावत के इस बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। बिपिन रावत के इस बयान पर आपत्ति जताते हुए ओवैसी ने ट्वीट कर कहा कि, ‘आर्मी चीफ को किसी पार्टी के विस्तार पर टिप्पणी करने का हक नहीं है। लोकतंत्र और संविधान में पार्टी के गठन की इजाजत है। आर्मी चुनी हुए नेतृत्व के अंदर काम करती है।’

सेना प्रमुख ने इस दौरान बांग्लादेशी घुसपैठ के बारे में बात करते हुए कहा कि इस घुसपैठ के लिए हमारे पश्चिमी पड़ोसी की छद्म नीति जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर को अशांत रखने के लक्ष्य के साथ पाकिस्तान द्वारा चीन के सहयोग से चलाई जा रहे परोक्ष युद्ध के तहत वहां ‘योजनाबद्ध’ तरीके से बांग्लादेश से लोगों को भेजा रहा है।

गौरतलब है कि असम में बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व में एआईयूडीएफ (ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) नाम का संगठन मुस्लिमों की आवाज उठाता है। यह दल मुस्लिमों के पैरोकार के रुप में 2005 में बना था और फिलहाल लोकसभा में उसके तीन सांसद और असम विधानसभा में 13 विधायक हैं।

सभी लोगों को साथ रहने में भलाई

जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल रावत ने आगे कहा कि- ”मैं सोचता हूं कि हमें समझना होगा कि इलाके में जाति, पंथ, धर्म या लिंग को देखे बिना सभी लोगों के साथ रहने में ही भलाई है। मुझे लगता है सबसे अच्छा यह होगा कि जो लोग वहां रह रहे हैं, उन लोगों की पहचान हमारे लिए जोखिम खड़ा करने वालों के रूप में न करके उनसे मिलजुलकर रहा जाए। हमें लोगों को अलग करके, उनकी पहचान करके ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा।

हां, कुछ लोगों की पहचान करना जरूरी है, जो हमारी लिए मुश्किल खड़ी करते हैं और जो अवैध अप्रवासी हैं। लेकिन जहां तक मेरी जानकारी में है तो मुस्लिम आबादी राज्य में 1218 से 1228 के बीच आई, यह पहली बार था जब मुस्लिम असम में आए थे। हमें यह समझना होगा कि वे बाद में नहीं आए, वे पहले आए। वे अहोम के समवर्ती आए। ये दोनों लोग आसम और उत्तर पूर्वी मंडल के लिए दावा कर चुके हैं। बांग्लांदेश से पलायन के दो कारण हैं।

पहला कि उनके लिए जगह नहीं बच रही है, मॉनसून में बड़ा इलाका बाढ़ से ग्रसित हो जाता है और उनके पास रहने लिए संकुचित क्षेत्र बचता है। दूसरा कारण यह है कि हमारे पश्चिमी पड़ोसी के कारण उनके आव्रजन की योजना बनाई जाती है। वे हमेशा यह कोशिश करेंगे कि इस इलाके में वे लोग कब्जा कर लें, यह प्रॉक्सी डाइमेंशन युद्ध है।” उन्होंने कहा कि हमारा पश्चिमी पड़ोसी अच्छे से प्रॉक्सी गेम खेल रहा है, जिसका साथ उत्तरी पड़ोसी दे रहा है।”

 

 

 

 

 

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