गुजरात दंगा: सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो मामले में IPS अधिकारी भगोरा की सजा पर रोक लगाने से किया इनकार

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सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2002 के सनसनीखेज बिलकिस बानो रेप और मर्डर केस में दोषी गुजरात के IPS अधिकारी आरएस भगौरा झटका देते हुए हाई कोर्ट द्वारा दिए गए उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट के दोषी करार देने के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अवकाशकालीन पीठ ने मंगलवार(30 मई) को कहा कि इस मामले की सुनवाई करने की कोई तात्कालिकता नहीं है, क्योंकि दोषी अधिकारी पहले ही सजा काट चुका है। पीठ ने आईपीएस अधिकारी की याचिका को जुलाई के दूसरे सप्ताह के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

भगोरा की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि यदि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जाती है तो सेवा के नियमानुसार उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय को दोषी करार देने के फैसले पर रोक लगानी चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते में सूचीबद्ध कर दी।

गुजरात में सेवाएं दे रहे आईपीएस अधिकारी आर एस भगोरा और चार अन्य पुलिसकर्मियों को निचली अदालत ने दोषमुक्त करार दिया था, लेकिन हाल में बंबई हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया था। हालांकि कोर्ट ने जितनी सजा काटी, उसे काफी बताया था और 15 हजार का जुर्माना किया था। भगौरा ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी।

बता दें कि बिलकिस बानो रेप और मर्डर केस में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 4 मई 2017 को 11 दोषियों की अपील खारिज करते हुए इन दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। हालांकि, कोर्ट ने सीबीआई की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें तीन आरोपियों को मौत की सजा देने की मांग की गई थी।

इस मामले में कोर्ट ने भगौरा समेत छह लोगों को बरी किए जाने के फैसले को भी पलट दिया था। इनमें डॉक्टर और पुलिसवाले शामिल हैं। इनपर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप है।

क्या है मामला?

3 मार्च, 2002 को गुजरात में गोधरा दंगों के बाद 17 लोगों ने बिलकिस के परिवार पर अहमदाबाद के रंधिकपुर में हमला किया था। इस हमले के दौरान 8 लोगों की हत्या कर दी गई थी। बिलकिस बानो उस समय मात्र 19 साल की थी, और 5 माह की गर्भवती थी। उनके साथ गैंगरेप किया गया था। रेप के बाद बिलकिस को पीटा गया और मरा हुआ जानकर छोड़ दिया गया। इस दर्दनाक घटना में बिलकिस की 3 साल की बेटी और दो दिन का बच्चे की भी मौत हो गई थी।

इस मामले में 21 जनवरी, 2008 को मुंबई की कोर्ट ने 11 लोगों को हत्या और गैंगरेप का आरोपी माना था। इसके बाद ट्रायल कोर्ट की ओर से सभी को उम्रकैद की सजा दी गई थी। इस फैसले के खिलाफ सभी आरोपियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की थी। तीन आरोपियों को मौत की सजा सुनवाने के लिए 2011 में सीबीआई इस केस को लेकर हाईकोर्ट गई थी।

विशेष अदालत ने जिन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, उनमें जसवंतभाई नाई, गोविंदभाई नाई, शैलेश भट्ट, राधेश्याम शाह, विपिन जोशी, केशरभाई वोहानिया, प्रदीप मोरदिया, बाकाभाई वोहानिया, राजनभाई सोनी, नीतीश भट्‍ट और रमेश चंदाना शामिल हैं।

 

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