बिहार: नेताओं के छलावे से परेशान ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का किया ऐलान, कहा- ‘पुल नहीं तो वोट नहीं’, ‘जनता का रिपोर्टर’ से लोगों ने बयां किए अपना दर्द

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अपने चुने हुए प्रतिनिधियों यानी सांसदों और विधायकों द्वारा एक पुल के निर्माण की उनकी कई सालों लगातार मांगों को नजरअंदाज करने से नाराज बिहार में एक गांव के लोगों ने इस साल के लोकसभा चुनावों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। उनकी शिकायतों के प्रति उदासीनता से निराश होकर करीब 1,500 से 2,000 मतदाताओं वाले इस गांव ने इस साल के संसदीय चुनावों का बहिष्कार करने का ऐलान किया है। यह मामला बिहार के मुजफ्फरपुर जिला में स्थित दुमरी गांव का है, जहां ऐसे ही बैनर लगे हुए हैं और उन पर लिखा है, ‘पुल नहीं तो वोट नहीं।’

‘जनता का रिपोर्टर’ के प्रधान संपादक रिफत जावेद से बातचीत में डुमरी गांव के स्थानिय निवासियों ने बताया कि गांव में करीब 2 हजार के आसपास मतदाता हैं। नदी के ऊपर कंक्रीट ब्रिज न बने होने की वजह से गांववालों को बांस से बने पुल का इस्तेमाल करना होता है। स्थानीय भाषा में इसे ‘चचरी पुल’ कहते हैं। ग्रामीणों ने अपने पैसों से इस पुल का निर्माण करवाया है। हालांकि, यह पुल हर बार बाढ़ में बह जाता है और बीते दो दशकों में कई बार बनवाया जा चुका है। यहां पांच दिन बाद 6 मई को मतदान होने वाला है।

ग्रामीणों ने कहा कि वे अपने चुने हुए सांसदों और विधायकों से इस दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए काफी संपर्क किया गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। एक निवासी ने कहा कि पुल के अभाव में हमारा गांव शेष क्षेत्र से कट गया है। ‘चचरी पुल’ तो सिर्फ एक कामचलाऊ है, जिसे हम ग्रामीणों ने बांस के इस्तेमाल से बनाया है। यह बेहद असुरक्षित है और अक्सर कई दुर्घटनाओं का कारण बन जाता है।

युवकी की चली गई जान

एक अन्य ग्रामीण (वीडियो देखें) ने भावुक होकर अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि कुछ साल पहले ही पुल से गिरने के बाद एक युवक की जान चली गई थी। इसके अलावा लोगों ने बताया कि पुल पर हाल ही में कुछ अन्य लोग भी हादसों का शिकार हुए हैं। एक युवक ने पुल की तरफ दिखाते हुए बताया कि कैसे वह कुछ दिनों पहले ही बांस के पुल से फिसल गया था। ‘जनता का रिपोर्टर’ से घायल युवक ने कहा कि उस घटना वह किसी तरह बाल बाल बच गया था, लेकिन वह अभी भी अपना हाथ नहीं हिला सकता।

2,000 मतदाताओं वाला यह डुमरी गांव मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। जहां मौजूदा सांसद अजय निषाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से हैं, वहीं स्थानीय विधायक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के हैं। लेकिन, निवासियों की शिकायत है कि बीजेपी सांसद ने उनकी दुर्दशा की अनदेखी की। एक युवक ने कहा कि राजद विधायक भी बस हम लोगों को आश्वासन ही देते आ रहे हैं, लेकिन हमारा पुल नहीं बनवा पाए।

झूठे वादे करते हैं नेता

दुमरी गांव के रहने वाले एक युवक ने कहा कि उन लोगों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है। उनका कहना है कि इलाके की बेहतरी के लिए वे लोग जनप्रतिनिधियों को चुनते हैं, लेकिन उन्हें बदले में राजनेताओं के बस झूठे वादे मिलते हैं। एक नाराज युवक ने रिफत से बातचीत में कहा कि अभी हाल ही में ग्राम विकास अधिकारी ने उन्हें वोट देने के लिए राजी करने की कोशिश की थी। इस पर ग्रामीणों ने कहा कि महोदय आप लिखकर दे दीजिए कि चुनाव बाद हम इस पुल को बनवा देंगे, तो हम लोग चुनाव में हिस्सा लेंगे, क्योंकि हमारी जान इस चचरी पुल के इस्तेमाल की वजह से खतरे में रहती है।

नहीं हो पा रही है शादी

ग्रामीणों के अनुसार, पुल नहीं होने की वजह से वह लोग आस-पास के अन्य गांवों से बिलकुल कट चुके हैं। अपना दर्द बयां करते हुए एक बुजुर्ग ने कहा कि एक पुल ना होने की वजह से उनके बच्चों की शादी नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी अपनी बेटी की शादी यहां नहीं करना चाहता। जिस क्षण वे इस पुल को देखते हैं तो कहते हैं कि जिस गांव में जाने का रास्ता ही ना हो वहां वे अपनी बेटियों की कैसे शादी कर सकते हैं? हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि वे इस वर्ष के चुनावों में भाग नहीं ले पाने के कारण दुखी हैं, अपने वर्षों के संघर्ष के लिए न्याय की मांग के लिए चुनाव के बहिष्कार का आह्वान एक अंतिम हथियार था।

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