महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में BJP को बड़ा झटका, 6 सीटों में से सिर्फ एक पर मिली जीत

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महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा झटका लगा है। क्योंकि, 6 सीटों पर हुए चुनावों में भाजपा को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली है। जबकि सत्तारूढ़ शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन ने 4 सीट पर जीत दर्ज की है। वहीं, एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई।

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इन चुनावों में मिली करारी हार के बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विधान परिषद चुनाव के नतीजे हमारी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। समाचार एजेंजी एएनआई के मुताबिक, देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव का परिणाम हमारे उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। हम ज्यादा सीटें जीतने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन हम सिर्फ एक सीट जीत सके। हमने महा विकास अघाड़ी (शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन) की ताकत को आकलन करने में गलती की।”

महाराष्ट्र के मंत्री और राकांपा नेता नवाब मलिक ने कहा कि, “यह परिणाम पिछले एक साल में महा विकास अगाड़ी और हमारे द्वारा किए गए कार्यों को प्रमाणित करते हैं। भाजपा को सच्चाई समझने की जरूरत है। चुनाव के बाद सरकार बदलने के बारे में उनका दावा खोखला साबित हुआ है।”

6 में से 5 सीटों पर महाविकास आघाड़ी की जीत पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा, ‘विधानपरिषद चुनाव में आघाड़ी की जीत गठबंधन पार्टियों के बीच एकता का सबूत हैं।’ वहीं, शिवसेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा पर तंज कसते हुए लिखा, “दरअसल, भाजपा के लिए इस बुरे अंत ने राज्य के लोगों के लिए एक अच्छी शुरुआत सुनिश्चित की है!”

भाजपा अपने कथित गढ़ स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में हार गई, उसकी सबसे बड़ी हार नागपुर सीट पर हुई। यहां भाजपा की पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। पूर्व में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधर राव फडणवीस इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस समेत महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल समेत पार्टी के कई नेताओं ने पुणे में भी प्रचार किया था, जहां विरोधी गठबंधन ने जीत दर्ज की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शरद पवार ने औरंगाबाद और पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज की है।

गौरतलब है कि, एक साल के अंदर के भाजपा के लिए राज्य में यह दूसरा बड़ा झटका है। पिछले साल नवंबर महीने में भाजपा के हाथों से महाराष्ट्र की सत्ता भी फिसल गई थी।

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