जिन्ना तस्वीर विवाद: हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बन रहा AMU में चल रहा छात्रों का आंदोलन, BHU सहित करीब 15 यूनिवर्सिटी के छात्रों ने किया समर्थन

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उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर जारी घमासान बढ़ता ही जा रहा है। इस विवाद में एक के बाद एक राजनीतिक दल के नेता कूदते जा रहे हैं। वहीं कर्नाटक और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी इस मुद्दे के जरिए राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास कर रही है। लेकिन सबसे खास बात यह है कि बीजेपी-आरएसएस की तमाम कोशिशों के बावजूद अलीगढ़ में अभी भी सौहार्द कायम है।

PHOTO: PTI

एएमयू में चल रहे छात्रों के आंदोलन का दायरा व्यापक होता जा रहा है और अब यह सिर्फ छात्र आंदोलन का ही केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता का भी प्रतीक बनता जा रहा है। एएमयू के आंदोलन में शिरकत करने के लिए बड़ी तादाद में देश भर से गैर-मुस्लिम आंदोलनकारी और बुद्धिजीवी भी शामिल हो रहे हैं। AMU की ओर से परीक्षा कार्यक्रम जारी करने और अलीगढ़ प्रशासन और राज्य सरकार की हठधर्मिता के वावजूद छात्रों ने आंदोलन की आंच को धीमी नहीं होने दी है।

BHU के छात्रों ने भी किया समर्थन

इस बीच एएमयू में चल रहे छात्रों के आंदोलन में एक नया मोड़ आ गया है। दरअसल, एएमयू छात्रों के समर्थन में अब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के छात्रों सहित विश्व भर के करीब 15 यूनिवर्सिटी के छात्र खुलकर आ गए हैं। बीएचयू के छात्रों ने एएमयू छात्रों के समर्थन में यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन भी किया। वहीं बीएचयू के छात्र नेता दीपक राजगुरु ने AMU के छात्र नेता शरजील उस्मानी को फोन कहा कि जिन्ना की तस्वीर हटाइएगा मत, हम आपके साथ है। इसके अलावा दीपक ने शरजील से कहा कि बनारस सहित पूरा देश आप लोगों के साथ है।

इस बात की जानकारी खुद AMU के छात्र शरजील उस्मानी ने एक फेसबुक पोस्ट कर दी है। शरजील उस्मानी ने BHU के छात्र दीपक को टैग करते करते हुए लिखा है, “बीएचयू से Deepak Rajaguru फोन करते हैं. पूछते हैं की हालात कैसे हैं अलीगढ़ में. हम उनको यहाँ के हालात के बारे में जानकारी देते हैं. वे पूछते हैं की जिन्नाह की तस्वीर हट गई क्या, हम बोलते हैं नहीं अभी तक वहीँ है. वे जवाब देते हैं की हटाइएगा भी नहीं, हम आपके साथ हैं, बनारस आपके साथ है, पूरा देश आपके साथ है. अभी दीपक भाई खुद मुश्किल में हैं. इनके यहाँ इनके प्रॉक्टर ने इनके और इनके साथियों के खिलाफ हत्या की कोशिश करने के आरोप में झूठा केस कर रखा है. इनका जुर्म बस इतना था की इन्होने प्रॉक्टर के खिलाफ प्रोटेस्ट किया था. संघियों ने पूरे देश के छात्रों को प्रताड़ित कर रखा है. ऐसे में भी वे हमारे साथ खड़े हैं. अब पीछे हटेंगे तो पूरा देश कोसेगा. अब पीछे नहीं हटना है. बस पढ़ना है और लड़ना है!”

शरजील उस्मानी के इस दावे को खुद दीपक राजगुरु ने अपने फेसबुक पर प्रतिक्रिया देकर पुष्टि की है। शरजील के पोस्ट को शेयर करते हुए दीपक ने लिखा है, “जिन्ना इतिहास का विषय है आस्था का नही…जहां पर जिन्ना की तस्वीर है वो एक म्यूजियम का हिस्सा जहां उन सभी की तस्वीरें है जो छत्रसंघ के आजीवन सदस्य रहे हैl अगर तस्वीर हटानी है तो भारत सरकार या प्रशासन के कहने पर हटाया जाएगा… किसी गुंडे मवालियों के कहने पर नही (क्योंकि तुम्हारा तरीका शरीफों वाला नही है…”

दीपक ने आगे लिखा है, “नोट- जिन्ना और सावरकर से मुझे जितनी नफरत है ना AMU और BHU से उससे कई गुना ज्यादे मोहब्बत है…”

दरअसल, जानकारों का कहना है कि AMU छात्रसंघ द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन की सबसे बड़ी जीत यह है कि इन्होंने अपने फोकस को जरा भी भटकने नहीं दिया है। वे जिन्ना की तस्वीर को लेकर जारी विवाद पर कुछ भी बोल नहीं रहे हैं। उनकी मांग है कि देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर हमला करने वालों के खिलाफ और छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हो और घटना की हाईकार्ट के जज से समयबद्ध न्यायिक जांच हो। इस मांग को लेकर ही ये आंदोलन चल रहा है और इसके समर्थन में देश-विदेश से लोग जुट रहे हैं।

क्या है मामला?

बता दें कि AMU में विवाद तब शुरू हुआ जब अलीगढ़ से सांसद सतीश गौतम ने एएमयू के छात्र संघ कार्यालय की दीवारों पर पाकिस्तान के संस्थापक की तस्वीर लगी होने पर आपत्ति जताई। दरअसल, एएमयू के यूनियन हॉल में जिन्ना की तस्वीर लगाने से नाराज हिंदू युवा वाहिनी के कुछ कार्यकर्ताओं ने दो मई को परिसर में घुसकर नारेबाजी की थी। उन पर मारपीट और भड़काऊ नारेबाजी करने के आरोप हैं।

एएमयू छात्रसंघ ने हिंदू युवा वाहिनी के प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। इस मांग के समर्थन में परिसर के गेट पर एकत्र हुए एएमयू छात्रों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस द्वारा किए गए बलप्रयोग में एएमयू छात्रसंघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी और छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष एम. हुसैन जैदी समेत छह लोग घायल हो गए थे।

3 मई से छात्रों का प्रदर्शन जारी

इस घटना के बाद एएमयू के छात्रों ने तीन मई से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया, जो आज भी जारी है। एएमयू के बाब-ए-सैयद गेट के पास अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन कर रहे छात्र वहीं पर जुमे की नमाज भी अदा कर रहे हैं। एएमयू टीचर्स एसोसिएशन ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर उनसे विश्वविद्यालय परिसर में हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं द्वारा अराजकता फैलाए जाने के घटनाक्रम की फौरन उच्चस्तरीय जांच कराने की गुजारिश की है। प्रशासन ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वह रमजान से पहले ही इस मामले की जांच आदि पूरी करा लेना चाहता है।

एसोसिएशन के सचिव प्रोफेसर नजमुल हसन ने बताया कि संगठन ने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है कि वह इस मामले को गंभीरता से लें, क्योंकि यह पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि दो मई को पुलिस हिंदू युवा वाहिनी के गुंडों को रोकने के बजाय तमाशबीन बनी रही। जिन्ना की तस्वीर विवाद पर विश्वविद्यालय के कुलपति का कहना है कि यह तस्वीर स्टूडेंट यूनियन के हॉल में लगी है और यह कोई नई बात नहीं है। उनका कहना है कि यह तस्वीर 1938 से ही लगी है।

15 यूनिवर्सिटी के छात्रों ने किया समर्थन 

जिन्ना की तस्वीर हटाने को लेकर छिड़े विवाद के बीच पिछले एक सप्ताह से धरने पर बैठे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के छात्रों ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया है। एएमयू प्रशासन की ओर से गठित ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने मंगलवार को धरना खत्म कराने का प्रयास जरूर किया, लेकिन बात नहीं बनी। छात्र संघ अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने ‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में दोहराया कि छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों और भड़काऊ व उकसाने वाले कृत्य के लिए हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं के खिलाफ जब तक कार्रवाई नहीं होती, धरना जारी रखेंगे।

‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में एएमयू छात्रसंघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने कहा कि हमारे आंदोलन को देश भर विश्वविद्यालयों से भारी समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू), जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (JMI) और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) सहित विश्व भर के करीब 15 यूनिवर्सिटी के छात्रों ने हमारे आंदोलन का समर्थन किया है। मशकूर ने कहा कि जब तक प्रशासन द्वारा हमारी मांग को मान नहीं लिया जाता है तब तक छात्रों का प्रदर्शन जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि आरएसएस के गुंडों द्वारा पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर जिस प्रकार से हमला करने की कोशिश की गई और एएमयू में अराजकता फैलाया गया वह शर्मनाक है। मशकूर ने बताया कि अगर प्रशासन द्वारा हमारी मांगों को मान भी लिया जाता है तब भी आरएसएस के विचारों के खिलाफ जो हमारा आंदोलन है वह आगे भी जारी रहेगा और हम इस आंदोलन को लेकर पूरे देश भर में जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें देश भर के सभी धर्म के छात्रों द्वारा भारी समर्थन मिल रहा है।

एएमयू कुलपति ने की न्यायिक जांच की मांग

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कुलपति तारिक मंसूर ने हाल में परिसर में हुई हिंसक घटनाओं की एक न्यायिक जांच की मांग की और प्रदर्शनकारी छात्रों पर ‘अत्यधिक बल’ प्रयोग की निंदा की है। हड़ताली छात्रों से अपने भविष्य को खतरे में नहीं डालने की अपील करते हुए मंसूर ने कहा कि उन्होंने न्यायिक जांच की मांग का समर्थन करके एएमयू समुदाय की सभी चिंताओं व भावनाओं को व्यक्त किया है।

उन्होंने कहा, “किसी भी परिस्थिति में छात्रों को अपनी पढ़ाई में नुकसान नहीं उठाना चाहिए, खास तौर से जब परीक्षा नजदीक हो। मैं सभी छात्रों से शांति बनाए रखने और पूरे मन से अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने व अपने करियर में अच्छा प्रदर्शन करने की अपील करता हूं।” मंसूर ने कहा, “मैं हमारे छात्रों का दुख समझता हूं।” उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में भर्ती घायल छात्रों से मिलकर उन्हें बहुत दुख हुआ। कुलपति ने अपनी पत्नी के साथ आंदोलन स्थल का दौरा किया।

तारिक मंसूर ने एक अपील में कहा, “प्रिय छात्रों कुछ ताकतों के जाल में नहीं फंसना चाहिए, जो हमारे शिक्षा संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश में जुटी हैं और आपके उज्जवल भविष्य से खेल रही हैं।” उन्होंने कहा कि चूंकि एएमयू एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है, “मीडिया का एक वर्ग अधूरे तथ्यों के साथ विश्वविद्यालय की लगातार एक नकारात्मक छवि गढ़ने की कोशिश कर रहा है।”

उन्होंने कहा, “विभिन्न समूहों की तरफ से विश्वविद्यालय पर हमला, भावनाओं में बहे बगैर बौद्धिक प्रतिकार और वैचारिक कार्रवाई की मांग करता है।” उन्होंने कहा, “मैं पहले ही हमारे छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा कर चुका हूं, जिससे मौजूदा व पूर्व एएमयू छात्र संघ के पदाधिकारियों व दूसरे छात्रों को चोटें आई हैं।”

 

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