उत्तर प्रदेश: BHU में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को ‘महिमामंडित’ करने वाले नाटक पर बवाल, छात्रों ने दर्ज कराई शिकायत

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उत्तर प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे को कथित रूप से महिमामंडित करने वाले एक नाटक के मंचन को लेकर विवाद शुरू हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह सांस्कृतिक उत्सव में इस नाटक का मंचन हुआ था, जिसके विरोध में बुधवार (21 फरवरी) को विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इस हफ्ते विश्वविद्यालय में होने जा रहे सांस्कृतिक समारोह में इस नाटक को खेला जाना है। छात्रों को आपत्ति है कि इस नाटक में कथित रूप से गोडसे को महिमामंडित किया गया है। उनका आरोप है कि यह विवादित मराठी नाटक ‘मैं नाथूराम गोडसे बोल रहा हूं’ पर आधारित है, जिसमें महात्मा गांधी को बंटवारे का दोषी और उनकी हत्या को कथित रूप से जायज ठहराया गया है।

छात्रों का आरोप है कि कला संकाय में इस नाटक का मंचन किया गया, जिसमें कथित रूप से गोडसे का ‘महिमामंडन’ किया गया। पुलिस दर्ज कराई शिकायत में छात्रों ने कहा है कि मराठी नाटक मी नाथूराम गोडसे बोलतोय पर आधारित इस मंचन में महात्मा गांधी की गलत छवि पेश की गई। छात्रों ने कहा है कि इस नाटक में महात्मा गांधी को कथित रूप से देश के बंटवारे के लिए जिम्मेदार बताया गया और उनकी हत्या को न्यायोचित ठहराने की कोशिश की गई।

एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक छात्रों ने कहा कि, “एक ऐसा कार्यक्रम जो देश के संवैधानिक मूल्यों पर चोट पहुंचाता है उसकी अनुमति कैसे दी गई, यह बड़े षड़यंत्र का सूचक है, अदालत द्वारा मौत की सजा दिए गए आतंकवादी गोडसे को गौरवान्वित करना देश की एकता और अखंडता पर चोट करने जैसा है और यह देशद्रोह से कम नहीं है, हम इस मामले में जांच चाहते हैं। छात्रों ने कहा कि गोडसे का महिमामंडन देशद्रोह के बराबर है।”

इस मामले वाराणसी के लंका थाने के एसएचओ संजीव मिश्रा ने कहा कि उन्होंने इस मामले में एक शिकायत को स्वीकार कर लिया है। इस कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, उसके बाद इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई है। छात्रों ने शि‍कायत की है कि प्रतिबंधि‍त साहित्य पर आधारित एक नाटक का मंचन हुआ है।

थानाध्यक्ष संजीव मिश्रा ने कहा कि, “हमें अबतक इस कार्यक्रम का कोई वीडियो नहीं मिला है, जैसे ही हम वीडियो पाते हैं घटना की जांच करेंगे, इस शिकायत को बीएचयू के प्रोक्टर बोर्ड को भी भेज दिया गया है, हम केस की जांच कर रहे हैं, साथ ही इस आरोप की भी जांच हो रही है कि क्या कार्यक्रम कुछ प्रतिबंधित साहित्य पर आधारित था।”

 

 

 

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  1. शिक्षण संस्थाओं को राजनीति से बचना चाहिए और शिक्षण पर ही ध्यान देना चाहिए. देखा जा रहा है कभी किसी विश्वविद्यालय में और कभी किसी दुसरे में बदअमनी होती रहती है. इसे रोका जाना चाहिए.

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