अच्छे दिनः BHU अस्पताल में तीन दिनों के अंदर 14 मरीजों की मौत, मरीजों को दी जा रही थी इंडस्ट्रियल गैस

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उत्तर प्रदेश के अस्पताल किस बदहाल व्यवस्था से गुजर रहे है इसकी चिंता न तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को है और न ही देश के PM मोदी को। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के हॉस्पिटल में एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। केवल तीन दिनों में ही 14 लोगों की मौत के बाद जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जांच का आदेश दिया तो लापरवाही का शर्मसार कर देने वाला खुलासा सामने आया। सर्जरी के लिए आए मरीजों को इंडस्ट्रियल गैस का इस्तेमाल कर बेहोश किए जाने का मामला सामने आया है। जबकि इस प्रकार की गैस का प्रयोग प्रतिबंधित है।

BHU अस्पताल

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के हॉस्पिटल में अनीस्थिसिया के लिए इंडस्ट्रियल गैस इस्तेमाल करने का मामला सामने आने के बाद सरकार की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जबकि मुख्यधारा के मीडिया से यह खबर गायब है शायद मीडिया इसे बड़ी खबर नहीं मानता है क्योंकि मामला अभी केवल 14 लोगों की मौत से ही जुड़ा हुआ है उससे भी बड़ी बात जो सामने आई है कि बीएचयू अस्पताल को गैस देने वाली कंपनी के निदेशक बीजेपी विधायक के पिता हैं। कंपनी के पास गैस बनाने और बेचने का लाइसेंस नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट कहती है कि तीन दिनों के भीतर इस अस्पताल के सर्जरी वार्ड में अचानक मौतों की संख्या बढ़ने की जांच कर रही केंद्र और राज्य सरकार की टीम ने यह बड़ी लापरवाही पकड़ी है। जांच दल ने पाया कि अस्पताल में दवाई के लिए मंजूर न की गई इंडस्ट्रियल गैस का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस गैस का इस्तेमाल सर्जरी कराने वाले मरीजों को बेहोश करने के लिए किया जा रहा था।

उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की 18 जुलाई को जारी जांच रिपोर्ट में कहा गया है, जांच में पाया गया कि अस्पताल में दवा के मकसद से न इस्तेमाल की जाने वाली नॉन-फार्मास्यूटिकल (गैर-चिकित्सकीय) नाइट्रस आक्साइड गैस का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह गैस मंजूर की गई दवाओं में शुमार नहीं की जाती।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इलाहाबाद के असिस्टेंट ड्रग इंस्पेक्टर केजी गुप्ती द्वारा दिये गये एक RTI के जवाब में बताया गया कि उत्तर प्रदेेश फूड सेफ्टी विभाग ने कंपनी के नैनी स्थिति कारखाने को कोई लाइसेंस नहीं दिया है, न तो नाइट्रोजन ऑक्साइड बनाने का और न ही ऑक्सीजन बनाने का।

जनसत्ता के हवाले से बताया गया कि रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बीएचयू अस्पताल में गैस की आपूर्ति करने वाली इलाहाबाद स्थिति निजी कंपनी परेरहट इंडस्ट्रियल एंटरप्राइजेज के पास मेडिकल गैस बनाने या बेचने का लाइसेंस नहीं है। कंपनी के निदेशक अशोक कुमार बाजपेयी इलाहाबाद उत्तरी के बीजेपी विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी के पिता हैं। उनके पास कंपनी के 1.21 करोड़ रुपये के शेयर हैं। कंपनी के मालिक से स्टील, केमिकल, पेपर मिल और सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां भी चलाते हैं।

14 लोगों की मौत पर अभी तक यूपी सरकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। मुख्यमंत्री समेत सारा प्रशासनिक अमला जश्न के माहौल में डुबा हुआ है। पूरे रीति-रिवाजों और पारम्परिक तरीकों से मुख्यमंत्री योगी इस बार दशहरें उत्सव को मना रहे है और दिपावली तक समस्त प्रदेश में उत्सव का माहौल बना रहेगा अगर ऐसे में किसी सरकारी लापरवाही के चलते 14 लोग मर जाते है तो यह कोई बड़ी घटना सरकार के समक्ष नहीं जान पड़ती है। जबकि पिछले दिनों गोरखपुर में बड़ी संख्या में मासूम की मौत पर सरकार नहीं चेती। वर्ना बनारस में फिर से गैस के कारण 14 लोगों की मौत कैसे हो सकती थी।

आपको बता दे इस समय मुख्यमंत्री योगी पार्टी को मजबूत बनाने की खातिर केरल में डेरा डाले हुए है। बनारस के अस्पताल में 14 लोगों की मौत का मामला राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खी नहीं बना है इसलिए अभी नेताओं का जमावाड़ा इन मौतों से अनजान नज़र आता है।

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