BHU में MA इतिहास की परीक्षा में पूछा गया-इस्लाम में तीन तलाक और हलाला एक समाजिक बुराई है, इसकी व्याख्या करें

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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) छात्रो के साथ परीक्षा के नाम पर एक विचारधारा विशेष को थोपने का अरोप कालेज प्रशासन पर लगा रहा है। MA की परीक्षा में अब इतिहास के पेपर में विषय से हटकर मोदी सरकार के द्वारा उठाए गए मुद्दों को तीन तलाक के बारें में प्रश्न पुछे जा रहे है।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एमके (MA) के इतिहास के पेपर में छात्रों से ट्रिपल तलाक, हलाला और अलाउद्दीन खिलजी पर सवाल पूछे गए।  यह सवाल मध्य भारत में समाज, संस्कृति और धर्म के पेपर में पूछा गया है। तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा में पूछे गए इस सवाल का जवाब 250 शब्दों में मांगा गया।

छात्रों का तर्क है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसे सवालों के बहाने छात्रों पर एक विचारधारा थोपने की कोशिश कर रहा है। वहीं, इस पूरे मामले पर बीएचयू के असिस्टेंट प्रोफेसर राजीव श्रीवास्तव ने कहा, अगर छात्रों को ऐसी चीजें नहीं पढ़ाई और पूछी जाएंगी तो उन्हें इसकी जानकारी कैसे होगी? ये सवाल मध्यकालीन इतिहास में खुद ब खुद अपनी जगह बना रहे हैं।

राजीव ने कहा, ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) बाल विवाह और सती प्रथा पर सवाल क्यों पूछते हैं? इस्लाम में भी कमियां हैं, जिन्हें बताना चाहिए। आपको बता दे इससे पूर्व राजनीति विज्ञान का एक प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें अजीब तरह का प्रश्न पुछा गया था।

कौटिल्य के अर्थशास्त्र को GST से जोड़कर निबन्ध लिखने का सवाल राजनीति विज्ञान के छात्रों से किया जा रहा है। जबकि अभी तक भी GST को लेकर सामान्य अवधारणा यही है कि बड़े-बड़े C.A. और आर्थिक व्याख्यादाता मोदी सरकार की GST को समझाने में सफल नहीं हो रहे है। दूसरे अभी मुख्यतौर पर GST को पाठ्यक्रमों से जोड़ने की खबर भी नहीं आई है ऐसे में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए GST पर निबन्ध लिखना एक टेड़ी खीर साबित हुआ है। जबकि छात्रों का कहना है कि ‘प्राचीन और मध्यकालीन भारत में सामाजिक और राजनीतिक विचार’ के तहत ये टॉपिक्स उनके कोर्स का हिस्सा नहीं हैं।

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