सहारनपुर हिंसा: भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत

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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर हिंसा मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी भीम आर्मी के संस्थापक और मुखिया चन्द्रशेखर आजाद उर्फ रावण को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार (2 नवंबर) को इलाहाबद हाई कोर्ट में जस्टिस मुख्तार अहमद की बेंच ने चंद्रशेखर को सभी मामलों में जमानत दे दी। उन पर सहारनपुर में हत्या के प्रयास, आगजनी और अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज था।

Bhim Army
(HT File Photo)

चंद्रशेखर को हाईकोर्ट ने सहारनपुर दंगे से जुड़े सभी चार मामलों में जमानत दी है। चंद्रशेखर पर हत्या के प्रयास, आगजनी सहित कई अन्य गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज थे। जस्टिस मुख्तार अहमद की बेंच ने जमानत मंजूर की। चंद्रशेखर को एक अन्य मामले में सेशन कोर्ट से पहले ही जमानत मिल चुकी है।

बता दें कि सहारनपुर में जातीय हिंसा भड़काने का आरोप में रावण को यूपी पुलिस ने 8 जून को हिमाचल प्रदेश के डलहौजी से गिरफ्तार किया था। सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा के बाद से ही चंद्रशेखर फरार चल रहा था। उसके खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया था। उस पर 12 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।

सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में गत पांच मई को हुई जातीय हिंसा के पीछे चंद्रशेखर का हाथ बताया जा रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिये उत्तर प्रदेश पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया था, जिसमें 10 पुलिस निरीक्षकों को शामिल किया गया था। एसआईटी को पांच मई से 23 मई के बीच सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा की कई घटनाओं से जुड़े 40 मामलों की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी।

पढ़िए, क्या है सहारनपुर हिंसा की पूरी कहानी?

दरअसल, सहारनपुर में पहला दंगा इसी साल 20 अप्रैल को हुआ था। तब सहारनपुर से बीजेपी के एमपी राघव लखनपाल शर्मा आंबेडकर जयंती का जुलूस बिना इजाजत निकाल रहे थे। उसमें हिंसा भड़क गई थी। जिसके बाद जिले के शब्बीरपुर गांव में महाराजा प्रताप जयंती के अवसर पर डीजे बजाने को लेकर ठाकुरों (राजपूत) और दलित समाज में 5 मई 2017 को बड़ा संघर्ष हुआ।

दलितों ने कथित तौर पर गांव से शोभायात्रा निकालने का विरोध किया और शोभायात्रा पर पथराव कर दिया। इस दौरान एक राजपूत युवक की मौत हो गई। शोभायात्रा पर पथराव की सूचना आसपास के गांवों के ठाकुर समाज के लोग भी वहां पहुंच गए। दोनों ओर से पथराव के साथ-साथ फायरिंग और तोड़फोड़ शुरू हो गई। इसके बाद शब्बीरपुल गांव के दलितों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई।

इस दौरान दलितों के 60 से ज्यादा मकान जला दिए गए थे और कई वाहन फूंक दिए थे। इसके बाद दलितों की भीम आर्मी की तरफ से इस घटना का विरोध किया गया था। वहीं, पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए 9 मई 2017 को सहारनपुर में इकट्ठा हुए दलितों का पुलिस से संघर्ष हो गया था। इस दौरान सहारनपुर में नौ जगहों पर हिंसा हुई।

इस मामले में भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर को नामजद किया गया। जिसके विरोध में 21 मई 2017 को हजारों दलितों ने दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। वहीं, 23 मई 2017 को एक बार फिर मायावती के दौरे के बाद दलितों और ठाकुरों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें सात लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से बाद में एक व्यक्ति की मौत हो गई।

 

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