जस्टिस लोया की रहस्यमय मौत की जांच चाहते हैं उनके चाचा, बोले- अनुज लोया ने दबाव में दिया होगा बयान

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गुजरात के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति फर्जी एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के दिवंगत न्यायाधीश बृजगोपाल हरकिशन लोया की कथित रहस्यमय मौत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उनके बेटे अनुज लोया ने रविवार (14 जनवरी) को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि उनके पिता की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में नहीं हुई। उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई थी।Loyaउन्होंने कहा कि पिता की मौत को लेकर हमारा किसी पर आरोप नहीं है। अनुज ने कहा कि, ‘चूंकि मुझे किसी पर शक नहीं इसलिए मुझे इस मामले में जांच की जरूरत ही नहीं है।’ वहीं जस्टिस लोया के चाचा श्रीनिवास लोया (81) ने अपने भतीजे की मौत की जांच कराने की मांग की है। लोया के चाचा ने कहा कि अनुज बहुत छोटा है और उसने दबाव में आकर यह बयान दिया होगा।

द कारवां पत्रिका से बातचीत में चाचा श्रीनिवास लोया ने कहा है कि जज के बेटे अनुज लोया अभी “बहुत जवान” है और 21 वर्षीय अनुज ने जब प्रेस को संबोधित कर रहा था को शायद वह दबाव में था। उन्होंने कहा कि अनुज ने दबाव में बयान दिया होगा। बता दें कि जस्टिस लोया ने बेटे अनुज ने कहा कि परिवार को किसी पर शक नहीं है और निवेदन किया कि उनके परिवार को परेशान करना बंद किया जाना चाहिए।

श्रीनिवास ने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रिश्तेदार के रूप में नहीं बल्कि यदि आप मुझसे एक नागरिक के रूप में पूछते हैं तो मेरा विचार है कि सर्वोच्च न्यायालय में शुरू की गई जांच को आगे बढ़ना चाहिए। यह एक नागरिक के रूप में मेरा निजी दृष्टिकोण है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों की ओर से चीफ जस्टिस पर केसों के आवंटन में पक्षपात का आरोप लगाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने सनसनीखेज आरोप लगाया है। ‘बार एंड बेंच’ वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक दवे ने सुप्रीम कोर्ट के जज पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा है कि सीबीआई के विशेष जज रहे जस्टिस बीएच लोया की रहस्यमय मौत के मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस अरुण मिश्रा के बीजेपी के शीर्ष नेताओं से करीबी संबंध हैं।

दवे ने कहा है कि, ‘हर कोई जानता है कि जस्टिस अरुण मिश्रा के बीजेपी और शीर्ष राजनेताओं के साथ करीबी संबंध हैं।’ यही नहीं उन्होंने कहा कि जस्टिस अरुण मिश्रा को लोया केस की सुनवाई नहीं करनी चाहिए। वहीं, जस्टिस लोया केस की संदिग्ध मौत की जांच की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं में से एक तहसीन पूनावाला ने भी वकील दवे से सहमति जताई है।

‘मेरे पिता की मौत संदिग्ध नहीं’

बता दें कि न्यायाधीश रहे बी.एच. लोया की कथित संदिग्ध हालात में मौत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उनके बेटे अनुज लोया ने रविवार (14 जनवरी) को कहा कि उनके पिता की मौत संदिग्ध नहीं है। उनके परिवार को किसी के खिलाफ कोई संदेह नहीं है। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अनुज ने नेताओं और गैर सरकारी संगठनों से अपील की कि वे उनके पिता की मौत को लेकर उनके परिवार को परेशान न करें।

अनुज ने कहा कि पिता की मौत को लेकर हमें कोई संदेह नहीं है। उनकी मौत के तुरंत बाद हम सदमे में थे। तब हमें संदेह था, लेकिन अब यह दूर हो चुका है। हमारा किसी पर कोई आरोप नहीं है। क्या न्यायाधीश लोया की मौत के मामले की जांच कराई जानी चाहिए, यह सवाल पूछने पर अनुज ने कहा कि मुझे किसी पर संदेह नहीं है। ऐसे में जांच की बात ही नहीं आती। इस दौरान न्यायाधीश लोया के वकील ने कहा कि इस मामले में कोई विवाद नहीं है।

इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की जरूरत नहीं है। यह बेहद दुखद घटना थी। हम इस मामले की राजनीति का शिकार नहीं होना चाहते हैं। गौरतलब है कि अनुज ने संवाददाता सम्मेलन ऐसे वक्त की है, जिससे पहले शुक्रवार (12 जनवरी) को जस्टिस लोया और अन्य मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्र के खिलाफ सरेआम आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि प्रधान न्यायाधीश मनमाने तरीके से न्यायाधीशों के पास मामले भेज रहे हैं।

क्या है मामला?

दरअसल, न्यायाधीश लोया की 1 दिसंबर 2014 को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। मौत का कारण दिल का दौरा बताया गया था। उस समय वह सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे। जज के मौत मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होनी है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट की वकील अनिता शिनॉय ने जनहित याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में जस्टिस लोया की मौत की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस मांग को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया, जिस पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी लोया की मौत की जांच की मांग की है। राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि जस्टिस लोया मामले की जांच होनी चाहिए।

जस्टिस लोया कथित सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह इस केस में बरी हो चुके हैं। बता दें कि अंग्रेजी मैगजीन ‘द कारवां’ में जस्टिस लोया की मौत पर परिवार के संदेह को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इस रिपोर्ट के बाद देश के कई हिस्सों में जस्टिस लोया की मौत पर सवाल उठने लगे थे।

 

 

 

 

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