नोटबंदी पर लिखा पत्रकार बरखा दत्त का लेख हुआ वायरल, कहा पीएम मोदी ने भारत को 1970 के दशक में धकेल दिया

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पत्रकार बरखा दत्त ने वॉशिंगटन पोस्ट में एक लेख लिखा है। बरखा दत्त के मुताबिक, बीजेपी के मार्केटिंग कंसलटेंट सुनील अलघ ने कहा, भारत में कुछ ज्यादा ही डेमॉक्रेसी है, इसलिए मुश्किल फैसले नहीं लिए जाते। उनका यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले पर आया था।

बरखा दत्त

नोटबंदी और इससे उपजी परेशानी पर बरखा अपना विशेलेषण करते हुए लिखती है कि पीएम मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोट अमान्य कर दिए। एेसे देश में जहां करीब 90 प्रतिशत ट्रांजेक्शंस कैश में होती हैं, वहां सिर्फ 4 घंटों पहले यह सूचना दी गई थी। इसका मकसद था कि टैक्स चोर को समानांतर अर्थव्यवस्था चला रहे हैं उसे खत्म करना। लेकिन खराब संपर्क और प्लानिंग के कारण लोगों को लंबी कतारों में लगना पड़ा।

इसके बाद बरखा 1971 को याद करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के भाषण और पीएम मोदी के भाषण में सामान्तर विषय पर बात करते हुए कहती है कि नरेंद्र मोदी का नोटबंदी फैसला और केंद्र के पास सारी ताकत कई मायनों में 1970 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के फैसलों की याद दिलाता है। नरेंद्र मोदी का यह नोटबंदी का फैसला 1969 में इंदिरा द्वारा बैंकों के राष्ट्रीयकरण के जैसा ही है।

मोदी ने नए साल की पूर्व संध्या पर जो भाषण दिया था, उसमें कुछ नारे इंदिरा के 1971 में दिए गए नारों जैसा था। उस समय इंदिरा ने कहा था, वह कहते हैं इंदिरा हटाओ, मैं कहती हूं गरीबी हटाओ। इसके बाद नरेंद्र मोदी ने कहा, वह कहते हैं मोदी को हटाओ, मैं कहता हूं भ्रष्टाचार हटाओ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरखा लिखती हैं कि नरेंद्र मोदी ने 50 दिन मांगे थे, लेकिन 2 महीने बीत जाने के बाद हमें पूछना चाहिए कि आखिर इस फैसले से हासिल क्या हुआ। अॉल इंडिया मैन्युफैक्चरर्स ने कहा कि राजस्व में 50 प्रतिशत और लघु उद्योगों की नौकरियों में 35 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा कि नोटबंदी से जो लक्ष्य हासिल किया जाना था वह तो अब साफ नहीं हुआ। अगर मसकद सिस्टम से काला धन हटाना था तो वह भी नहीं हुआ। सिर्फ 6 से 10 प्रतिशत पैसा ही काले धन के रूप में सामने आया। दूसरी चीज सारे बंद हुए नोट वापस सिस्टम में आ गए।

 

 

2 COMMENTS

  1. Where is the black money ??
    Where is compensation for 150+ people who died ??
    Demonetisation was fancy decision. The economy has taken good beating. 2million people jobless. Only a person who has no wife and kids will take such gruesome decision. Go to hell

  2. सोनिका क्रांतिवीर shared Himanshu Kumar’s post.
    3 hrs ·

    Himanshu Kumar
    12 hrs ·
    लेधा का नाम पहली बार कब सुना था, पता नहीं,

    लेकिन कल्लूरी का नाम जब मैंने पहली बार सुना था वो याद है।

    मैं कल्लूरी को जीवन भर नहीं भूल सकता।

    जब मैं पत्रकारिता का विद्यार्थी हुआ करता था तो पता चला पुण्य प्रसून वाजपेयी को प्रिंट का रामनाथ गोयनका अवार्ड मिला है।

    जिस रिपोर्ट पर ये पुरस्कार मिला था उसके केंद्र में लेधा थीं।

    सरगुजा की लेधा को गर्भवती हालात में पुलिस उठाकर ले गई थी।

    कई बलात्कार सहने के बाद उसने जेल में ही बच्चे को जन्म दिया।

    बाद में पुलिस ने लेधा के पति को सरगुजा के बीच गांव में गोली मारी और एक बार फिर उठाकर जेल ले गए और फिर-फिर बलात्कार किया।

    पुलिस ने लेधा को तहस-नहस कर दिया।

    और इस पुलिस का नेतृत्व संभाल रहे थे कल्लूरी,

    जिसने थाने में लेधा को नंगा किया था, बलात्कार किया और करवाया था।

    आज के दिन कल्लूरी को राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया , आइए 26 जनवरी मनाएं।

    Dilip Khan

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