9/11 के पीड़ितों को सऊदी अरब पर मुकदमे की इजाजत देने के पक्ष में नहीं बराक ओबामा

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अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उस विधेयक पर वीटो का इस्तेमाल किया है, जिसमें 9/11 हमलों के पीड़ितों के परिजनों को सऊदी अरब के खिलाफ मुकदमे की इजाजत दिए जाने की बात की गई है।

राष्ट्रपति ने इस आशंका के कारण वीटो इस्तेमाल किया कि इस कदम का अमेरिका के राष्ट्रीय हितों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ओबामा ने कहा कि ‘आतंकवाद के प्रायोजकों के खिलाफ न्याय’ (जेएएसटीए) अधिनियम को रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाली कांग्रेस के दोनों चैम्बरों ने पारित कर दिया था। इस विधेयक के पारित होने से संप्रभुता संबंधी पुराना अंतरराष्ट्रीय सिद्धांत खतरे में पड़ जाता और इससे अमेरिकी हितों एवं विदेश में रह रहे देश के नागरिकों पर बुरा प्रभाव पड़ता।

ओबामा ने कहा कि यह विधेयक अमेरिकी ‘फॉरेन सोवरन इम्युनिटीज एक्ट’ के प्रावधानों और पुराने मानकों के अनुरूप नहीं है और इससे देश में सभी विदेशी सरकारों को मिली न्यायिक प्रक्रिया से छूट निजी वादियों के केवल इन आरोपों के आधार पर छिन जाती कि किसी विदेशी सरकार के देश से बाहर किए गए कार्यों का उस समूह या व्यक्ति से कोई संबंध या भूमिका है, जिसने अमेरिका के भीतर आतंकवादी हमला किया।

अमेरिका के राष्ट्रपति ने इस विधेयक के परिणामों पर चिंता जताते हुए कहा कि जेएएसटीए से संप्रभुता संबंधी छूट को लेकर पुराने अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों पर असर पड़ेगा। अगर यह वैश्विक स्तर पर लागू हो जाता है तो इसका देश के राष्ट्रीय हितों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा और इससे निकटतम साझेदारों के साथ हमारे संबंध भी जटिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर जेएएसटीए को लागू कर दिया जाता है तो ऐसी संभावना है कि अदालतें अमेरिकी सहयोगियों एवं साझीदारों के खिलाफ लगाए गए मामूली अपराधों पर भी विचार करें।

व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जोश अर्नेस्ट ने अमेरिका के राष्ट्रपति के इस निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि ओबामा कांग्रेस के सदस्यों से नियमित बातचीत के बजाय इस विधेयक के अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकने वाले दीर्घकालीन परिणाम को लेकर चिंतित हैं।

वहीं ओबामा के इस निर्णय की आलोचना करते हुए राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘आतंकवाद के प्रायोजकों के खिलाफ न्याय विधेयक को लेकर राष्ट्रपति ओबामा का वीटो इस्तेमाल करने का निर्णय शर्मनाक है और यह उनके राष्ट्रपति काल के सबसे निचले बिंदुओं में से एक माना जाएगा।’

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