पतंजलि आंवला जूस के बाद आटा नूडल्स का नमूना भी जांच में हुआ फेल

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बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि के कई उत्पाद क्वालिटी टेस्ट में धीरे-धीरे फैल होते जा रहे है। पिछले कुछ दिनों पहले सेना की कैंटीन ने पतंजलि के आंवला जूस पर प्रतिबंध लगा दिया था। उसके बाद अब पतंजलि स्टोर से लिया गया आटा नूडल्स का नमूना जांच में फेल हो गया है।
बाबा रामदेव
अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक, बाबा रामदेव के पतंजलि स्टोर से लिया गया आटा नूडल्स का नमूना जांच में फेल हो गया है। जांच में आटा नूडल्स को घटिया स्तर का पाया गया है, पतंजलि आटा नूडल्स में एश कंटेंट (टेस्टमैकर) की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एफडीए के नगर खाद्य सुरक्षाधिकारी राकेश कुमार ने जिला अभिहीत अधिकारी डॉ. श्वेता सैनी के निर्देशन में शहर के मुरसान गेट स्थित बाबा रामदेव के पतंजलि उत्पाद स्टोर अनमोल ट्रेडर्स के यहां 23 फरवरी 2017 को छापामारी की थी।
इस छापामारी के दौरान पतंजलि ब्रांड की कई खाद्य वस्तुओं के नमूने लिए गए थे, जिसमें से आटा नूडल्स के नमूने की रिपोर्ट गुरुवार (1 जून) को आई है और जांच में यह नमूना अधोमानक पाया गया है। इसके अलावा बर्फ खाना स्थित मुन्नालाल एंड संस के यहां से लिए गया सप्तऋषि कुटू आटा के नमूना भी जांच में मिस ब्रांड पाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी हरींद्र सिंह ने बताया कि जो नमूने जांच में फेल आए हैं, उनके विक्रेताओं को नोटिस भेजा जा रहा है इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। ख़बरों के अनुसार, रिपोर्ट की बात मानें तो खाने के लिए पतंजलि आटा नूडल्स है नुक्सानदायक है। गौरतलब है कि, इससे पहले भी बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि के कई उत्पाद क्वालिटी टेस्ट में फेल हो चुके है।

आपको बता दे कि इससे पूर्व बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि पर कोर्ट ने 11 लाख का जुर्माना लगाया था। मिथ्या छाप (मिस ब्रांडिंग) एवं भ्रामक प्रचार के पांच मामलों में दोषी पाए जाने पर एडीएम हरिद्वार (न्याय निर्णायक अधिकारी) ने पतंजलि आयुर्वेद की पांच उत्पादन यूनिटों पर ये जुर्माना लगाया था।

बता दें कि यह पहला मौका नहीं है, जब पतंजलि आयुर्वेद अपने खाद्य प्रदार्थों के गुणवत्ता के दावों को लेकर रेग्युलेटर्स के साथ विवादों में घिरी है। इससे पहले बिना लाइसेंस के नूडल्स और पास्ता बेचने के लिए उसकी खिंचाई की गई थी। तब एफएसएसएआई ने सेंट्रल लाइसेंसिंग अथॉरिटी को निर्देश दिया था कि वह पतंजलि को उसके खाद्य तेल ब्रैंड के विज्ञापन को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी करे। सीएसडी की शुरुआत 1948 में की गई थी, इसके तहत 3901 कैंटीन और 34 डिपो हैं। इसका मैनेजमेंट रक्षा मंत्रालय करता है।

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