ऑस्ट्रेलिया में अडानी की कोयला खदान के खिलाफ प्रदर्शन विरोध प्रदर्शन, ‘अडानी रोको’ अभियान में उतरे हजारों लोग

0

ऑस्ट्रेलिया में शनिवार को हजारों लोगों ने भारतीय कॉरपोरेट दिग्गज अदानी समूह की कोयला खदान परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। विरोधियों ने अडानी एंटरप्राइजेज के प्रस्तावित कारमाइकल कोयला खदान परियोजना का विरोध करने के लिए पूरे ऑस्ट्रेलिया में ‘मानव श्रृंखला’ बनाकर ‘अडानी को रोको’ लिखा।

Photo Courtesy: Hindustan Times

यह विरोध देश की सबसे बड़ी कोयले की खदान के खिलाफ था। इस मामले में कई वर्षों से पर्यावरण और वित्तपोषण के कई अहम मुद्दों को अनदेखा किया जा रहा था।

पर्यावरण के लिए काम कर रहे संगठनों का आरोप है कि क्वींसलैंड स्टेट में बनने वाली यह खदान ग्लोबल वॉर्मिंग का कारण बनेगी। साथ ही ग्रेट बैरियर रीफ को भी नुकसान पहुंचाएगी। ‘अडानी को रोको’ नाम के इस मूवमेंट के तत्वाधान में कुल 45 विरोध-प्रदर्शन हुए। ऐक्टिविस्ट ग्रुप 350 की ऑर्गेनाइजरक ब्लेयर ने कहा कि सिडनी के बोंडी बीच पर 1000 से अधिक लोगों ने ‘स्टॉप अडानी’ का संकेत बनाया।

पर्यावरण समूहों का दावा है कि ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड राज्य में खदानों ने ग्लोबल वार्मिंग में योगदान दिया और ग्रेट बैरियर रीफ को नुकसान पहुंचाया।

एक नए सर्वेक्षण के मुताबिक इस परियोजना के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया के आधे से ज्यादा लोगों ने विरोध किया है। लंदन के द गार्जियन ने शनिवार को बताया कि देश के चारों ओर 40 विरोध प्रदर्शनों पर 30 से अधिक पर्यावरण समूहों को शामिल होने की बात कहीं गई जिसमें अडानी गठबंधन के सदस्य शामिल हुए। वे समुद्र तटों और देश भर के अन्य प्रमुख स्थानों पर ‘मानव श्रृंखला’ में ‘अडानी को रोको’ दिखाकर अपना विरोध दर्ज किया और प्रर्दशन किया।

भारत के दिग्गज कारोबारियों में से एक गौतम अडानी की ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड स्थित कोयले की खान की परियोजना पर अब वहां ही हस्तियां भी सवाल उठा रही हैं। 21.7 अरब डॉलर की यह परियोजना इस साल शुरू हुई थी जिसे संघीय और क्वींसलैंड राज्य सरकार से हरी झंडी मिली थी।

अडानी समूह के पास ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में कोयला खदानों का ठेका है। रिपोर्ट के अनुसार अडानी समूह ने ऑस्ट्रेलिया सरकार को 22 अरब डॉलर टैक्स और राजस्व के तौर पर देने का वादा किया लेकिन एबीसी ने विशेषज्ञों के हवाले से दावा किया है कि अडानी समूह से जुड़े ट्रस्टों और कंपनियों के बड़े जाल की वजह से सरकार को दिए जाने वाले टैक्स में काफी कमी हो सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here