अर्नब गोस्वामी पर अरूण शौरी ने कहा, “सबसे पहले टाइम्स नाउ के प्रोग्राम पर पाबन्दी लगनी चाहिए “

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सीनियर पत्रकार और वाजपेयी सरकार के कैबिनेट में मंत्री रहे अरूण शौरी ने टाइम्‍स नाऊ के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्‍वामी जोरदार हमला किया है।

अर्नब गोस्वामी द्वारा मीडिया के एक वर्ग पर पाबंदी लगाए जाने कि मांग पर टिप्पणी करते हुए अरूण शौरी ने कहा कि अगर पाबन्दी लगाना ही है तो टाइम्‍स नाऊ के एडिटर-इन-चीफ के प्रोग्राम न्यूज़ ऑवर को बंद कर देना चाहिए।

उन्‍होंने कहा, ” सरकार भी अर्नब गोस्वामी को ज़्यादा संजीदगी से नहीं लेती है दूसरी बात अगर मीडिया के कुछ हिस्सो पर अगर पाबंदी ही लगानी है तो अच्छा यह होगा कि उसके (अर्नब) के प्रोग्राम को बंद कर दिया जाए लेकिन यह मसले का हल नहीं है। ख़राब पत्रकारिता का जवाब अच्छी पत्रकारिता से दिया जाना चाहिए। पाबंदी का अधिकार सरकार को कतई नहीं दिया जाना चाहिए। अगर आपको अखबारों में छपी ख़बरों से आपत्ति है या फिर आप कुछ चैनल को पसंद नहीं करते हैं तो फिर चैनल देखना या अखबार खरीदना बंद कर दीजिये। लेकिन मीडिया पर पाबन्दी लगाने की मांग बकवास है।

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गौरतलब है कि हाल ही में अभी एनडीटीवी की सीनियर जर्नलिस्‍ट बरखा दत्‍त ने भी अरनब गोस्‍वामी पर जोरदार हमला किया था। उन्‍होंने उनके पेशे पर ही सवाल उठाते हुए कहा था कि क्‍या यह शख्‍स पत्रकार है। बरखा ने अपने फेसबुक पोस्‍ट में लिखा था, ‘टाइम्‍स नाऊ मीडिया पर अंकुश लगाने, जर्नलिस्‍ट्स पर केस चलाने और उन्‍हें सजा देने की बात कहता है? क्‍या यह शख्‍स जर्नलिस्‍ट है? मैं उनकी ही तरह इस इंडस्‍ट्री का हिस्‍सा होने पर शर्मिंदा हूं।

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क्‍या है मामला?

आपको बता दें कि अर्नब गोस्‍वामी ने कुछ दिन पहले अपने शो न्‍यूज ऑवर में जिस विषय पर चर्चा की, उसका विषय था pro pak doves silent. इस चर्चा में बीजेपी प्रवक्‍ता संबित पात्रा, आर्मी रिटायर्ड अफसर जनरल जीडी बक्‍शी, मेजर गौरव आर्या, कश्‍मीर के नेशनल पैंथर्स पार्टी के अध्‍यक्ष भीम सिंह, सुप्रीम कोर्ट की वकील मिहिरा सूद, पॉलिटिकल एक्‍ट‍िविस्‍ट जॉन दयाल मौजूद थे। जीडी बक्‍शी ने कहा, ‘यह इन्‍फॉर्मेशन वॉरफेयर (सूचना के जरिए जंग) का युग है। हम मीडिया के हमले का शिकार हो रहे हैं।’ बक्‍शी ने कहा कि कुछ मीडिया वाले कश्‍मीरी लोगों को अलगाव के लिए भड़का रहे हैं। इस दौरान अरनब ने कहा कि वे इससे पूरी तरह सहमत हैं। इससे पहले, कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए अरनब गोस्‍वामी कहते हैं, ”जब लोग खुलेआम भारत का विरोध और पाकिस्‍तान व आतंकवादियों के लिए समर्थन जाहिर करते हैं तो ऐसे लोगों के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए?” अरनब ने कहा कि वे ऐसे लोगों को स्‍यूडो लिबरल्‍स (छद्म उदारवादी) कहते हैं। चर्चा के दौरान अरनब गोस्‍वामी ने कहा कि ऐसे लोगों का ट्रायल होना चाहिए। चर्चा के दौरान अरनब गोस्‍वामी ने एक जगह यह भी कहा कि मीडिया में कुछ खास लोग बुरहान वाणी के लिए हमदर्दी दिखाते हैं। यह वही ग्रुप है जो अफजल गुरु के लिए काम करता है और उसकी फांसी को साजिश बताता है। अरनब ने कहा कि मीडिया में छिपे ऐसे लोगों पर बात होनी चाहिए।

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  1. Thanks to Arun Shourie he has,of late, realized the vultures of hatred of criminalization/communilations prevalent in the country.

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