असम: 1.9 करोड़ लोगों की नागरिकता पर लगी पक्की मुहर, NRC का पहला मसौदा जारी

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नव वर्ष 2018 के आगाज के बीच असम में आधी रात से बहुप्रतीक्षित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) का पहला ड्राफ्ट जारी हो गया है। इसमें प्रक्रिया में असम के 3 करोड़ 29 लाख लोगों में से 1 करोड़ 90 लाख लोगों को जगह दी गई है, जिन्हें कानूनी रूप से भारत का नागरिक माना गया है। बाकी नामों को लेकर विभिन्न स्तरों पर जांच-पड़ताल की जा रही है। यह जानकारी रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया शैलेष ने आधी रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी, जहां उन्होंने पहले ड्राफ्ट की कॉपी भी दिखाई।

(Express photo: Dasarath Deka/File)

बता दें कि असम में रहने वाले भारतीय नागरिकों की पहचान के लिए उनका नाम इस रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है। यह कदम असम में अवैध रूप से बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकालने के लिए किया गया है। पहली सूची में 1.9 करोड़ लोगों के नाम हैं। जिन लोगों के नाम इस सूची में हैं उनकी नागरिकता पक्की हो गई है।

बता दें कि असम के 3 करोड़ 29 लाख लोगों ने अपने आप को भारत का वैध नागरिक घोषित करने लिए आवेदन दिया था। इनमें से 1 करोड़ 90 लाख लोगों के नाम सूची में आ गए हैं। बाकी बच गये 1.39 करोड़ लोगों की नागरिकता की जांच की प्रक्रिया में है।

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक शैलेष ने कहा कि, ‘यह पहला ड्राफ्ट है। इसमें 1.90 करोड़ लोगों के नाम हैं, जिनका जांच हो गया है। जैसे ही सत्यापन का काम पूरा होता जाएगा, वैसे ही हम अन्य ड्राफ्ट भी लाएंगे।’ एनआरसी के स्टेट कॉर्डिनेटर प्रतीक हजेला ने कहा कि जिन लोगों का नाम पहली लिस्ट में नहीं है, उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि, ‘नामों का सत्यापन एक लंबी प्रक्रिया है। ऐसे में संभावना है कि इसमें कई ऐसे नाम भी छूट गए हों जो एकल परिवार से आते हैं। बाकी दस्तावेजों का सत्यापन वेरिफिकेशन किया जा रहा है, ऐसे में लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।’

जब अगले ड्राफ्ट की समय सीमा को लेकर सवाल पूछा गया तो रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने कहा कि इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के हिसाब से होगा। स्टेट कॉर्डिनेटर हजेला ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया को साल 2018 में पूरा कर लिया जाएगा।

बता दें कि आवेदन की प्रक्रिया मई 2015 में शुरू हुई थी। हजेला ने बताया कि इसका फाइनल ड्राफ्ट आने के बाद ही शिकायतों को भी जगह दी जाएगी। क्योंकि बचे हुए नाम आखिरी ड्राफ्ट में आ सकते हैं। असम में लाखों लोगों को ये साबित करना है कि उनके माता-पिता 1971 में बांग्लादेश बनने से पहले ही असम में आकर रहने लगे थे।

पूरे असम में एनआरसी के सेवा केंद्रों पर पहले ड्राफ्ट में लोग अपने नाम चेक कर सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन और एसएमएस सेवा से भी वे अपने नाम चेक कर सकते हैं। आरजीआई ने बताया कि इस प्रक्रिया के लिए 2013 से काम चल रहा है। पिछले तीन सालों में करीब 40 सुनवाई हो चुकी हैं। यह कदम राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दरअसल, यहां सिटिजनशिप और अवैध प्रवासियों का मुद्दा राजनीतिक रूप ले चुका है। बीजेपी के लिए एनआरसी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका इस्तेमाल चुनावी भाषणों के वक्त अवैध प्रवास की वजह से असम की खोने वाली पहचान को सुरक्षित रखने के नाम पर किया गया था। यह एक ऐसा पैंतरा था जो 2016 के चुनाव में जीत हासिल करने में मददगार साबित हुआ था।

 

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