करगिल युद्ध के नायक मोहम्मद सनाउल्लाह को विदेशी घोषित करने के मामले में आया नया ट्विस्ट, जांच अधिकारी पर ही उठे सवाल

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पूर्व भारतीय सैनिक और असम के निवासी मोहम्मद सनाउल्लाह को विदेशी घोषित करने के मामले में नया मोड़ आ गया है। इस मामले के गवाहों ने इन्वेस्टिगेंटिग ऑफिसर (असम पुलिस सीमा शाखा के सब-इंस्पेक्टर चंद्रमल दास) के खिलाफ फर्जी और झूठी गवाही का केस दर्ज कराया है। नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) में अधिकारी का नाम नहीं होने के बाद यह कदम उठया गया है।

मोहम्मद सनाउल्लाह

रिटायर्ड आर्मी अधिकारी मोहम्मद सनाउल्लाह के एक रिश्तेदार फजलुल हक ने बताया कि, ‘इस मामले के गवाह सनाउल्लाह के ही गांव के हैं। इन्वेस्टिंग ऑफिसर ने साजिश के तहत उनका नाम फंसाया है। इंस्पेक्टर ने गलत तरीके से लोगों का नाम डालकर झूठी गवाही लिख दी, पुलिस उनसे ना कभी मिली और ना ही बयान लिया।’

उन्होंने बताया कि इस संबंध में जांच अधिकारी चंद्रमल दास के खिलाफ केस दर्ज करा दिया गया है। असम पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर अपनी सेवाएं दे रहे आर्मी के रिटायर्ड अधिकारी को विदेशी घोषित कर दिया गया है। करगिल की जंग में अपनी सेवाएं दे चुके जवान को फॉरनर्स ट्राइब्यूनल की तरफ से विदेशी करार दिया गया है।

असम के कामरूप जिले में विदेशी ट्रिब्यूनल ने 2008 में सनाउल्ला के खिलाफ एक मामला दर्ज किया था, क्योंकि उसका नाम “डी” (संदिग्ध) मतदाता के रूप में सूचीबद्ध था। उन्हें असम के कामरुप जिले के कलाहीकाश गांव से गिरफ्तार किया गया। विदेशी घोषित होने के बाद सनाउल्लाह को परिवार सहित गोलपाड़ा के डिटेंशन कैंप में भेज दिया गया। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, तीन गवाहों ने कहा कि सनाउल्ला एक वास्तविक भारतीय नागरिक था और असम सीमा पुलिस द्वारा उसे परेशान किया जा रहा था, जिसने उसे संदिग्ध मतदाता घोषित करने की साजिश रची थी।

इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जब फॉरनर्स ट्राइब्यूनल ने मोहम्मद सनाउल्लाह के खिलाफ मामले की सुनवाई की थी मई 2008 और अगस्त 2009 में मोहम्मद सनाउल्लाह मणिपुर में थे और आतंकवाद रोधी अभियानों का संचालन कर रहा थे। यहां तक कि चंद्रामल दास ने भी स्वीकार किया है कि उस दौरान सनाउल्लाह असम में नहीं थे।

कारगिल युद्ध के अनुभवी के परिवार के सदस्यों ने सनाउल्ला को ‘विदेशी’ घोषित करने के लिए कथित रूप से साजिश करने के लिए असम सीमा पुलिस और दास के खिलाफ गौहाटी उच्च न्यायालय में मामला दर्ज करने का फैसला किया है।’ कथित तौर पर अपने ही पूर्व सैनिक की मदद करने से इनकार करने के बाद भारतीय सेना की भूमिका भी निंदा के दायरे में आ गई है।

बता दें कि करीब 30 सालों तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं देने वाले मोहम्मद सनाउल्लाह को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था। उन पर विदेशी होने का आरोप लगाया गया है, जो देश में अवैध रूप से रह रहे हैं।

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