असम एनआरसी LIVE: नागरिकता की फाइनल ड्राफ्ट जारी, 2.89 करोड़ वैध नागरिक, 40 लाख लोगों के नाम गायब

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असम में सोमवार (30 जुलाई) को बहुप्रतीक्षित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) का फाइनल ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है। जिसके मुताबिक इस लिस्ट में 2.89 करोड़ लोगों को नागरिकता के योग्य पाया गया है, वहीं करीब 40 लाख लोगों के नाम इससे बाहर रखे गए हैं। बता दें कि नागरिकता के लिए 3,29,91,384 लोगों ने नागरिकता के लिए आवेदन किया था, जिनमें से 2,89,38,677 को नागरिकता के लिए योग्य पाया गया है।

(REUTERS)

इम मौके पर रजिस्ट्रार जनरल ने कहा कि यह ड्राफ्ट है और इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। जिन लोगों के नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं हुए हैं, उन्हें क्लेम करने और आपत्ति दर्ज करने का मौका है। एनआरसी में उन सभी भारतीय नागरिकों के नाम, पते और फोटोग्राफ हैं जो 25 मार्च, 1971 से पहले से असम में रह रहे हैं।

राष्ट्रीय नगरिक रजिस्टर में कहा गया है कि जो लोग वैध नागरिक नहीं पाए गए हैं उनको निर्वासन नहीं किया जाएगा। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बहरहाल कानून-व्यवस्था को बनाये रखने के लिए समूचे राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर समन्यक प्रतीक हाजेला ने एनआरसी का अंतिम ड्राफ्ट जारी करते हुए बताया कि 3.29 करोड़ (3,29,91,380) आवेदकों में से 2.90 करोड़ (2,89,83,677) वैध नागरिक पाए गए। इसका मतलब हुआ कि इस फाइनल ड्राफ्ट में करीब 40 लाख लोगों के नाम नहीं है। दिसंबर में जारी हुए पहले ड्राफ्ट में 1.9 करोड़ नाम शामिल थे। NRC को ऑनलाइन और NRC सेवा केंद्रों पर जारी किया गया।

एनआरसी ड्राफ्ट को देखते हुए कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए समूचे राज्य में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सात जिलों- बारपेटा, दरांग, दीमा, हसाओ, सोनितपुर, करीमगंज, गोलाघाट और धुबरी में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लगा दी गई है। पुलिस अधीक्षकों ने अपने-अपने संबंधित जिलों में संवेदनशील इलाकों की पहचान की है और किसी भी अप्रिय घटना खासकर अफवाह से होने वाली घटनाओं को रोकने के लिये स्थिति पर बेहद सावधानी से निगरानी बरती जा रही है।

देखिए लाइव अपडेट्स:-

  • पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी ने कहा, ‘ऐसे कई लोग हैं जिनके पास आधार कार्ड और पासपोर्ट थे लेकिन फिर भी उनका नाम ड्राफ्ट में नहीं है। सही दस्तावेजों के बावजूद लोगों को शामिल नहीं किया गया। कई लोगों को उनके सरनेम की वजह से भी बाहर कर दिया गया है। क्या सरकार जबरदस्ती लोगों को बाहर निकालना चाहती है?’
  • राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ने इसमें कुछ भी नहीं किया है। सारा काम सुप्रीम कोर्ट के पर्यवेक्षण में हुआ है। सरकार पर निराधार आरोप लगाकर हमले किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह अंतिम सूची है लेकिन दावे और विरोध का उन्हें पर्याप्त मौका दिया जाएगा। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
  • असम कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा ने कहा कि 40 लाख लोगों का नाम लिस्ट में न शामिल होना काफी ज्यादा और आश्चर्यजनक आकंड़ा है। इस रिपोर्ट में काफी खामियां हैं। हम इस मुद्दे को सरकार के सामने और संसद में रखेंगे। इसके पीछे बीजेपी की राजनीति है।
  • राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर किसी का नाम फाइनल लिस्ट में नहीं भी है तो वे फॉरेन ट्रिब्यूनल से संपर्क कर सकते हैं। किसी के खिलाफ कोई बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जाएगी, इसलिए परेशान होने की जरूरत नहीं है।
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रिपोर्ट के मुताबिक मसौदा में जिनके नाम उपलब्ध नहीं होंगे उनके दावों की पर्याप्त गुंजाइश होगी। अगर वास्तविक नागरिकों के नाम दस्तावेज में मौजूद नहीं हों तो उन्हें घबराने की जरूरत नहीं होगी। बल्कि उन्हें (महिला/पुरूष) संबंधित सेवा केंद्रों में निर्दिष्ट फॉर्म को भरना होगा। ये फॉर्म सात अगस्त से 28 सितंबर के बीच उपलब्ध होंगे और अधिकारियों को उन्हें इसका कारण बताना होगा कि मसौदा में उनके नाम क्यों छूटे। इसके बाद अगले कदम के तहत उन्हें अपने दावे को दर्ज कराने के लिये अन्य निर्दिष्ट फॉर्म भरना होगा, जो 30 अगस्त से 28 सितंबर तक उपलब्ध रहेगा।

इसके बाद आवेदक अपने नामों को निर्दिष्ट एनआरसी सेवा केन्द्र जाकर 30 जुलाई से 28 सितंबर तक सभी कामकाजी दिनों में सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक देख सकते हैं। बता दें कि असम में रहने वाले भारतीय नागरिकों की पहचान के लिए उनका नाम इस रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है। यह कदम असम में अवैध रूप से बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकालने के लिए किया गया है।

 

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