सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CM केजरीवाल ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलने का मांगा समय

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आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्‍ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार(6 जुलाई) को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलने का समय मांगा जिससे कि वह दिल्ली में सत्ता टकराव पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आग्रह कर सकें।

शिवसेना
file photo- (Mohd Zakir/HT Photo)

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, केजरीवाल ने कहा कि यह बहुत ‘खतरनाक’ है कि केंद्र सरकार उपराज्यपाल को दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच सत्ता टकराव पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करने की सलाह दे रही है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘गृह मंत्रालय ने उपराज्यपाल को सलाह दी है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उस हिस्से को नजरअंदाज करें जो उपराज्यपाल की शक्तियों को केवल तीन विषयों तक सीमित करता है। यह खतरनाक है कि केंद्र सरकार उपराज्यपाल को माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों का पालन न करने की सलाह दे रही है।’

उपराज्यपाल की शक्तियों में कटौती करने वाले कोर्ट के आदेश के बाद भी उनके कार्यालय और दिल्ली सरकार के बीच सेवा विभाग के नियंत्रण को लेकर विवाद लगातार बना हुआ है। केजरीवाल पर जवाबी हमला करते हुए उपराज्यपाल अनिल बैजल ने कहा कि गृह मंत्रालय की 2015 की यह अधिसूचना ‘लगातार वैध बनी हुई है’ कि ‘सेवाएं’ संबंधी विषय दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

इस सप्ताह के शुरू में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के चंद घंटे बाद दिल्ली सरकार नौकरशाहों के तबादलों और तैनाती के लिए एक नयी व्यवस्था लेकर आई और मुख्यमंत्री को स्वीकृति देने वाला प्राधिकार बना दिया था। हालांकि, सेवा विभाग ने यह कहते हुए इसे मानने से इनकार कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में जारी अधिसूचना को निरस्त नहीं किया है जिसमें तबादलों और तैनाती के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को प्राधिकार बनाया गया था।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला दिया कि उपराज्यपाल निर्वाचित सरकार की सलाह मानने को बाध्य है और वह बाधा डालने वाले नहीं हो सकते। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि उपराज्यपाल ‘विघ्नकारक’ के रूप में काम नहीं कर सकते। संविधान पीठ ने तीन अलग-अलग लेकिन सहमति के फैसले में कहा कि उपराज्यपाल के पास स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है।

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