पैनलिस्ट द्वारा अपने साख पर सवाल उठाए जाने से नाराज अर्नब गोस्वामी ने NDTV के पूर्व मालिक पर बोला तीखा हमला

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रिपब्लिक टीवी के संस्थापक अर्नब गोस्वामी को बुधवार रात अपने ही चैनल पर उस वक्त शर्मिंदा होना पड़ा, जब उनके एक मेहमान ने एक पत्रकार के रूप में उनकी साख पर सवाल उठा दिया। पत्रकारिता में अपनी डिग्री के स्रोत के बारे में बताने के लिए पूछे जाने पर, गोस्वामी ने केंद्र और राज्यों में भाजपा सरकारों के लिए महत्वपूर्ण संगठनों और व्यक्तियों के खिलाफ तीखा हमला किया। इस दौरान उन्होंने NDTV के पूर्व मालिक को भी नहीं छोड़ा।

अर्नब गोस्वामी

दरअसल, गोस्वामी उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अध्यादेश, 2019 के ड्राफ्ट को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी गई मंजूरी के फैसले पर चर्चा कर रहे थे। बता दें कि उत्तर प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों के लिए योगी सरकार नया अध्यादेश लाई है। इसके मुताबिक, अब निजी विश्वविद्यालयों को अप्रूवल के लिए एक शपथपत्र देना होगा कि वह (यूनिवर्सिटी) किसी भी प्रकार की राष्ट्र विरोधी गतिविधि में शामिल नहीं होगी और साथ में कैंपस में इस तरह की गतिविधियां नहीं होने दी जाएंगी।

उन्हें शपथपत्र में यह भी देना होगा कि वे अपनी यूनिवर्सिटी का नाम किसी भी राष्ट्र विरोधी गतिविधि में इस्तेमाल नहीं होने देंगे। अगर ऐसा हुआ तो यह ऐक्ट का उल्लंघन माना जाएगा और सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इसके लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अध्यादेश, 2019 के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई। सरकार इस अध्यादेश का प्रतिस्थानी विधेयक विधानमंडल के मानसून सत्र में पेश करेगी।

बहस शुरू करते हुए, गोस्वामी ने कहा कि जब 2016 में जेएनयू परिसर के अंदर भारत विरोधी नारे लगाए गए थे, तो टुकडे-टुकडे गैंग और उसके समर्थकों को उनकी सही जगह दिखाने के लिए पूरा देश एक साथ आ गया था। तीन साल बीत चुके हैं और अब योगी (आदित्यनाथ) सरकार विश्वविद्यालय परिसरों के अंदर, कानूनी रूप से और आधिकारिक रूप से राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए निर्णायक कदम उठाई है। जिस वजह से अब वही लॉबी बहुत घबराई हुई है।

डॉक्टर फारूक खान के रूप में पहचाने जाने वाले अपने एक पैनलिस्ट को संबोधित करते हुए, जो उनकी बात से असहमत थे, गोस्वामी ने कहा कि ‘इस तुकड़े टुकडे गिरोह’ को ‘व्यवस्थित रूप से नष्ट कर दिया गया था।’ कार्यक्रम में इससे पहले, उन्होंने मांग की कि टुकडे टुकडे गैंग को समाप्त किया जाना चाहिए। गोस्वामी ने भारत के उदारवादी वर्ग के लिए टुकडे टुकडे गैंग शब्द का उपयोग करते हैं, जिन्होंने अक्सर भाजपा सरकारों की सांप्रदायिक और दलित विरोधी नीतियों का विरोध किया है।

फारूक भी गोस्वामी को छोड़ने के मूड में नहीं थे। जब उनकी बारी आई, तो उन्होंने बहुत सम्मान से अपनी बात रखते हुए कहा कि अर्नब मुझे लगता है कि आप आज बहुत गलत हैं। आपको पता नहीं है कि हमारे पास इस देश में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) है। आप धारा 124 ए को नहीं जानते, आप धारा 121 को भी नहीं जानते हैं। फारूक ने गोस्वामी से पूछा कि महात्मा गांधी की हत्या का जश्न मनाए जाने के बाद भी वह आतंकियों की आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को संसद भेजने के लिए भाजपा के खिलाफ चुप क्यों हैं?

उन्होंने गोस्वामी से कहा कि यह वही है जो आप व्यक्त करना चाहते हैं? अपने पैनलिस्ट के आरोपों पर आपत्ति जताते हुए, गोस्वामी ने गुस्से में प्रतिक्रिया व्यक्त की और उन्होंने पूछा कि आप कैसे जानते हैं कि मैं क्या संदेश देना चाहता हूं? स्वामी को और उकसाते हुए पैनलिस्ट ने पूछा कि अर्नब, मुझे नहीं पता कि आप इस देश के कानून के बारे में अनभिज्ञ क्यों हैं? इसके बाद नाराज गोस्वामी ने अपने ही मेहमान के खिलाफ हमला करते हुए कहा कि एक व्यक्ति के लिए? जो गलती से वकील बन जाता है। मुझे नहीं पता कि आपने अपना कानून कहां से बनाया है। मुझे आपके प्रोफेसरों पर तरस आता है। मुझे नहीं पता कि आपको कानून की परीक्षा में आपको कौन से अंक मिले हैं।

गोस्वामी को जवाब देते हुए पैनलिस्ट ने कहा कि मुझे नहीं पता कि आपने अपनी पत्रकारिता कहां से की है… आप कुछ भी नहीं जानते हैं। आप IPC नहीं जानते हैं। इसके बाद बाद गोस्वामी ने अपना आपा खो दिया और उन्होंने NDTV के पूर्व मालिकों को भी नहीं बख्शा, क्योंकि उन्होंने प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय के खिलाफ सेबी की कार्रवाई की याद दिलाते हुए इस मुद्दे को खोदने की कोशिश की।

गोस्वामी ने प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय के खिलाफ सेबी की कार्रवाई की याद दिलाते हुए कहा कि मैं सबसे बड़ा कानूनी विशेषज्ञ नहीं हूं, मैंने कभी दावा नहीं किया। मैं प्रशिक्षित वकील भी नहीं हूं। मेरे पास कानून की औसत समझ है… क्या आप उस कानून पर विश्वास करते हैं जब CBI ने FCRA के उल्लंघन के लिए इंदिरा जयसिंग के NGO, वकीलों के कलेक्टर्स की खिंचाई की है?… मुझे मेरा दूसरा सवाल पूछना है। मेरा दूसरा सवाल और भी चुभने वाला होगा… स्वतंत्र निकाय, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) वित्तीय मामलो के लिए एक निश्चित लुटियन मीडिया संस्थान की खिंचाई कर रहा है।

इसके बाद उनके डिबेट शो में नियमित रूप से मेहमान के रूप में शामिल होने वाले एक दक्षिणपंथी पैनलिस्ट ने तंज भरे अंदाज में पूछा कि क्या उन्हें एनडीटीवी के खिलाफ अपने हमले में प्रत्यक्ष होना चाहिए, जहां उन्होंने एक रिपोर्टर और एंकर के रूप में लंबे समय तक काम किया। इस पर गोस्वामी और उनके दक्षिणपंथी पैनलिस्ट हंसने लगे। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय पर नई दिल्ली टेलिविजन लि. (एनडीटीवी) के निदेशक (डायरेक्टर) अथवा कोई अन्य प्रबंधकीय पद (मैनेजेरियल पोजिशन) लेने पर दो साल के लिए पाबंदी लगा दी है।

सेबी ने कहा कि इस दौरान दोनों को सिक्यॉरिटीज मार्केट से भी दूर रहना होगा, क्योंकि उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक और विश्वप्रधान कमर्शल प्राइवेट लि. (वीसीपीएल) के साथ किए लोन अग्रीमेंट से जुड़ी प्रमुख सूचनाएं जाहिर नहीं कीं। हालांकि, दोनों को अपीलीय प्राधिकारी से राहत मिली, जिसने सेबी के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।

 

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