पुणे में दो समुदाय के बीच हिंसक झड़प में 1 की मौत, भीमा-कोरेगांव लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ मनाने जुटे थे लाखों दलित

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महाराष्ट्र के पुणे में दंगे जैसी स्थिति होने से वहां काफी तनावपूर्ण माहौल हो गया है। दरअसल, महाराष्ट्र के पुणे में सोमवार (1 दिसंबर) को भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ मनाने जुटे लाखों दलितों की शहर में कोरेगांव भीमा, पबल और शिकरापुर गांव के दूसरे समुदाय के लोगों से हिंसक झड़प हो गई, जिसमें एक शख्स की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए।न्यूज एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक पुणे जिले में भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सोमवार को हुई हिंसा में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई। बता दें कि भीमा-कोरेगांव की लड़ाई में ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने पेशवा की सेना को हराया था।

दलित नेता इस ब्रिटिश जीत का जश्न मनाते हैं। ऐसा समझा जाता है कि तब अछूत समझे जाने वाले महार समुदाय के सैनिक ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना की ओर से लड़े थे। हालांकि, पुणे में कुछ दक्षिणपंथी समूहों ने इस ‘ब्रिटिश जीत’ का जश्न मनाए जाने का विरोध किया था।

पुलिस ने बताया कि जब लोग गांव में युद्ध स्मारक की ओर बढ़ रहे थे तो सोमवार को दोपहर शिरूर तहसील स्थित भीमा कोरेगांव में पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बताया कि हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हुई है। हालांकि, उसकी पहचान और कैसे उसकी मौत हुई इसका अभी ठीक-ठीक पता नहीं चला है।

हिंसा तब शुरू हुई जब एक स्थानीय समूह और भीड़ के कुछ सदस्यों के बीच स्मारक की ओर जाने के दौरान किसी मुद्दे पर बहस हुई। भीमा कोरेगांव की सुरक्षा के लिए तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि, ‘‘बहस के बाद पथराव शुरू हुआ। हिंसा के दौरान कुछ वाहनों और पास में स्थित एक मकान को क्षति पहुंचाई गई।’’

उन्होंने बताया कि पुलिस ने घटना के बाद कुछ समय के लिए पुणे-अहमदनगर राजमार्ग पर यातायात रोक दिया। उन्होंने बताया कि गांव में अब हालात नियंत्रण में है। अधिकारी ने बताया कि, ‘‘राज्य रिजर्व पुलिस बल की कंपनियों समेत और पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।’’ उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन नेटवर्क को कुछ समय के लिए अवरुद्ध कर दिया गया, ताकि भड़काऊ संदेशों को फैलाने से रोका जा सके।

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