मॉब लिंचिंग और चंडीगढ़ छेड़खानी मामले में चुप्पी साधने वाले अमिताभ बच्चन ने तीन तलाक पर दी प्रतिक्रिया

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सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में मंगलवार(22 अगस्त) को मुस्लिम समुदाय में प्रचलित एक बार में ‘तीन तलाक’ कह कर तलाक देने की प्रथा खत्म करते हुये इसे पवित्र कुरान के सिद्धांतों के खिलाफ और इससे इस्लामिक शरिया कानून का उल्लंघन करने सहित अनेक आधारों पर निरस्त कर दिया।अमिताभयह फैसला आने के बाद मॉब लिंचिंग और चंडीगढ़ में आईएएस अधिकारी की बेटी वर्णिका कुंडू से छेड़छाड़ मामले में चुप्पी साधने वाले बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने तीन तलाक पर बुधवार(23 अगस्त) को अपनी चुप्पी तोड़ दी। बिग बी ने कहा कि फैसला खुद ही बोलता है और ‘हम अपने देश के कानून से तर्क नहीं कर सकते।’

अमिताभ बच्चन ने ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘फैसला खुद ही बोलता है और हम अपने देश के कानून से तर्क नहीं कर सकते।’ उन्होंने कहा कि समाज में महिलाएं जिस तरह से पाबंदियों का सामना करती हैं, यह देखकर उन्हें दुख होता है।

बच्चन ने कहा, ‘लड़कियों को शिक्षित होने से रोक दिया जाता है, क्योंकि उसका विवाह होना है, इसलिए उस पर पैसे क्यों खर्च किए जाएं। मुझे उनके लिए दुख होता है। वे बाहर आकर और मेरे सामने (केबीसी के लिए) हॉट सीट पर बैठने के लिए वर्षों से प्रचलित सामाजिक नियमों को तोड़ती हैं, वे उसमें सफल होती हैं जिसका सपना उन्होंने अपने लिए देखा होता है जो बहुत ही प्रेरक होता है।’

तीन तलाक खत्म

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला देते हुए मुस्लिमों में एक साथ तीन तलाक की प्रथा को अमान्य, असंवैधानिक और गैरकानूनी करार दिया। अब तीन बार तलाक कहने से कोई निकाह खत्म नहीं होगा। न्यायालय ने कहा कि तीन तलाक की यह प्रथा कुरान के मूल सिद्धांत के खिलाफ है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जे. एस. खेहर की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने 18 माह की सुनवाई के बाद 3-2 के बहुमत से तीन तलाक को बराबरी के अधिकार वाले संविधान के अनुच्छेद 14, 15 के तहत असंवैधानिक घोषित कर दिया। तीनों जजों ने कहा कि 1937 के मुस्लिम शरीयत कानून के तहत तलाक को धारा 2 में मान्यता दी गई है और उसकी विधि बताई गई है।

संविधान के सिद्धांतों को देखते हुए तीन तलाक स्पष्ट रूप से मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ है, इसलिए इसे सिरे से रद्द किया जाता है। बहुमत के फैसले से अलग मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर ने अल्पमत फैसले में तीन तलाक को गलत माना, लेकिन इसे रद्द करने से इनकार दिया।

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर ने तीन तलाक की इस प्रथा पर छह महीने की रोक लगाने की हिमायत करते हुये सरकार से कहा कि वह इस संबंध में कानून बनाए। सीजेआई ने कहा कि मुस्लिम देशों में भी तीन तलाक खत्म कर दिया गया है, ऐसे में हम क्यों पीछे रहें?

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