असम NRC पर संसद में संग्राम LIVE: राज्यसभा में अमित शाह के बयान पर विपक्ष का जोरदार हंगामा

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असम में सोमवार (30 जुलाई) को बहुप्रतीक्षित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) के दूसरे और अंतिम मसौदे को जारी कर दिया है। जिसके मुताबिक कुल 3.29 करोड़ आवेदन में से इस लिस्ट में 2.89 करोड़ लोगों को नागरिकता के योग्य पाया गया है, वहीं करीब 40 लाख लोगों के नाम इससे बाहर रखे गए हैं। बता दें कि एनआरसी का पहला मसौदा 31 दिसंबर और एक जनवरी को जारी किया गया था। पहली लिस्ट में असम की 3.29 करोड़ आबादी में से 1.90 करोड लोगों को शामिल किया गया था।

(AFP file photo )

इस अंतिम मसौदे के आने के बाद से राजनीति भी शुरू हो गई है। संसद से लेकर सड़क तक विपक्षी दल और मोदी सरकार के बीच तकरार जारी है। इसी मसले पर मंगलवार (31 जुलाई) को राज्यसभा में जारी चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के पास असम समझौते को लागू करने की हिम्मत नहीं थी और बीजेपी सरकार ने हिम्मत दिखाकर यह काम किया है।

अमित शाह ने कहा, ‘अवैध घुसपैठियों के मुद्दे पर सैकड़ों असम का युवा शहीद हुए। 1985 में पूर्व पीएम राजीव गांधी ने असम अकॉर्ड लागू किया था। यही समझौता NRC की आत्मा थी। इस समझौते में यह प्रावधान था कि अवैध घुसपैठियों को पहचानकर उनको सिटीजन रजिस्टर से अलग कर एक नेशनल रजिस्टर बनाया जाएगा। कांग्रेस के पीएम ने यह समझौता किया लेकिन यह पार्टी इसे लागू नहीं कर सकी। हममे हिम्मत थी और इसलिए हमने इसपर अमल किया।’

वहीं कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद ने कहा कि नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी सिर्फ 40 लाख लोगों पर नहीं, सरकार पर भी हो। उन्होंने कहा कि सरकार साबित करे कि 40 लाख लोग नागरिक नहीं हैं। आजाद ने कहा कि सरकार किसी भी धर्म के लोगों को देश से न निकाले। आजाद ने कहा कि हर व्यक्ति को कानूनी सहायता मिलनी ही चाहिए, किसी के साथ जबदस्ती नहीं होनी चाहिए। दूसरे विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा।

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