EXCLUSIVE: अयोध्या विवाद को लेकर सभी पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश में जुटे श्री श्री रविशंकर से अमित शाह नाराज, जानिए क्यों

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‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घोर समर्थक श्री श्री रविशंकर इन दिनों अयोध्या विवाद को अदालत के बाहर सुलझाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। हालांकि इस साल मार्च महीने में उन्होंने अयोध्या विवाद पर चेतावनी देते हुए कहा था कि मंदिर के पक्ष में फैसला न आने पर खून खराबा और भारत में सीरिया जैसे हालात हो सकते हैं। उन्होंने ये बातें अंग्रेजी समाचार चैनल इंडिया टुडे और एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू के दौरान कही थी। इस बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है।

दरअसल, चौंकाने वाला एक रहस्योद्घाटन यह हुआ है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अयोध्या भूमि विवाद के लिए अदालत के बाहर सभी पक्षों के बीच सुखद समाधान खोजने के श्री श्री के प्रयासों पर नाराजगी व्यक्त की है। बीजेपी नेतृत्व के एक बेहद करीबी ने नाम न बताने की शर्त पर ‘जनता का रिपोर्टर’ से कहा कि वह (अमित शाह) श्री श्री रविशंकर द्वारा अयोध्या विवाद को हल करने के प्रयास से खुश नहीं हैं। वह इस बात से चिंतित हैं कि अगर रविशंकर इस प्रयास में सफल हो जाते हैं तो बीजेपी के हाथ से 2019 लोकसभा चुनाव में एक अहम मुद्दा निकल जाएगा।

आपको बता दें कि फिलहाल अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अभी पिछले महीने ही सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले की सुनवाई पर कहा था कि वह जनवरी, 2019 में इस मामले की सुनवाई की तारीख तय करेगा। अब इस मामले में अगले साल जनवरी तक नई तारीखों का फैसला किया जा सकता है। उधर सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई टलने के बाद हिंदूवादी संगठनों और बीजेपी नेताओं ने मंदिर निर्माण की मांग तेज कर दी है।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी भी पिछले महीने अमित शाह पर आरोप लगाया था कि बीजेपी अध्यक्ष उन्हें अयोध्या मामले से अगल होने का निर्देश दिया है। स्वामी ने न्यूज एक्स को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उनका पूरा विचार उन्हें इस मामले से बाहर करने का था। इतना ही नहीं सॉलिसिटर जनकर तुषार मेहता ने भी इसका समर्थन किया था। हालांकि, बीजेपी सांसद ने दावा किया था कि आरएसएस इससे सहमत नहीं था।

आपको बता दें कि राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) धर्मसभा का आयोजन करने जा रही है। 25 नवंबर को होने वाली इस धर्मसभा में करीब एक लाख कार्यकर्ताओं के जुटने की संभावना है। हिंदू संगठनों की हलचल को देखते हुए बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने हाल ही में सुरक्षा न बढ़ाने पर अयोध्या से पलायन करने की चेतावनी दी थी। जिसके बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने उनकी बढ़ा दी है।

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