अमित शाह का ‘फर्जी गुजरात गौरव’ देखने के बाद ‘विकास पागल हो गया’

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राज्य भर में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों से पहले रविवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गुजरात में अपनी पार्टी की गौरव यात्रा को ध्वज दिखाने के लिए रवाना हुए थे। यहां अमित शाह को पाटीदार युवाओं के गुस्से का सामना करना पड़ा, जिन्होंने भाजपा के विरोध में नारे लगाए और आनंद में उस समारोह में उनके भाषण को बाधित किया।

अमित शाह
Photo courtesy: Hindustan Times

बाद में एक सभा को संबोधित करते हुए, शाह ने कांग्रेस की तीन पीढ़ियों पर गुजरात की तीन पीढ़ियों को अपमानित आरोप लगाया।समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा कि राहुल गांधी यहां आए हैं और हमसे जवाब मांगते हैं कि बीजेपी ने राज्य के लिए क्या किया है। हम आपसे (कांग्रेस) ऐसे अन्याय के लिए उत्तर मांग रहे हैं जो आपके शासन की तीन पीढ़ियों ने हमारे साथ किया।

शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की पहली पीढ़ी ने सरदार पटेल का अपमान किया और उन्हें अपनी मान्यता और भारत रत्न नहीं दिया, और कांग्रेस की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मोरारजी देसाई के खिलाफ अन्याय किया था।

उन्होंने कहा कांग्रेस की तीसरी पीढ़ी सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी से अन्याय किया है और गुजरात इसका जवाब मांगता हैं। शाह ने गुजरात पर पीढ़ी दर पीढ़ी अन्याय करने का आरोप लगाया और कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में, राज्य के लोग उन लोगों का मजाक उड़ाएंगे, जो गुजरात के विकास के माॅडल को मुद्दा बना रहे है।

कई विश्लेषकों ने इस तथ्य को बताने के लिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कैसे अमित शाह बीजेपी के 22 वर्षों के शासन के दौरान गुजरात के विकास पर टिप्पणी करने से बचने में सफल रहे?

पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने लिखा, गुजरात ने आपके लिए 20 साल के लिए मतदान किया, श्री शाह आपने क्या किया?

टिप्पणीकार अशोक स्वेन ने इसे गुजरात का नकली गर्व बताया। वह अमित शाह को लिखते है कि एक चतुर रणनीति के तहत गुजरात की तरक्की के नाम पर नकली गुजराती गर्व को परोसा जा रहा है। फर्जी गुजराती अस्मिता दिखाने के लिए गुजरात का विकास पागल हो रहा है।

अशोक स्वेन की यह टिप्पणी भाजपा के पिछले 22 वर्षों के कथित कुशासन के खिलाफ गुजरात में सोशल मीडिपा पर चल रहे वायरल केम्पेन के संदर्भ में थी।

विकास पागल हो गया है के माध्यम से भाजपा की सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी दल कांग्रेस पार्टी, ने विकास के मोर्चे पर राज्य भर में खराब प्रदर्शन को उजागर करने की पहल की हुई है। इस महीने की शुरुआत में यह अभियान शुरू होने के बाद से, भगवा पार्टी पीछे की ओर खिसकती नजर आई है।

जबकि कई विश्लेषकों को संदेह है कि गुजरात में शासन के बारे में अपने ट्रैक रिकॉर्ड के बारे में बातचीत से बचने के लिए अमित शाह और उनके वरिष्ठ सहकर्मी मुख्य रूप से विकास के मुद्दे से हटकर लोगों का ध्यान व्यर्थ के दिखावटी मुद्दों की और दिला सकते है।

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