नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में अमित शाह ने दी गवाही, बोले- ‘दंगे वाले दिन विधानसभा में मौजदू थीं माया कोडनानी’

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गुजरात के अहमदाबाद में साल 2002 में हुए नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में सोमवार(18 सितंबर) को भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अहमदाबाद की स्पेशल एसआईटी कोर्ट में गवाही देने के लिए पेश हुए। इस दौरान शाह ने कोर्ट को बताया कि हिंसा वाले दिन माया कोडनानी विधानसभा में मौजूद थीं। बता दें कि इस मामले में मुख्य आरोपी और पूर्व विधायक माया कोडनानी की अपील पर कोर्ट ने 12 सितंबर को अमित शाह को समन जारी कर पेश होने का आदेश दिया था।

(File Photo PTI)

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने विशेष एसआईटी अदालत को बताया कि 28 फरवरी, 2002 को नरौदा गाम में हुए दंगे की सुबह गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी प्रदेश विधानसभा और अस्पताल में मौजूद थीं। शाह ने नरौदा गाम दंगा मामले में अहमदाबाद अदालत को बताया कि वह घटना वाले दिन सुबह सोला सिविल अस्पताल में माया कोडनानी से मिले थे। पुलिस उन्हें और माया कोडनानी को सुरक्षित स्थान पर ले गयी थी, क्योंकि गुस्साई भीड़ ने उन्हें अस्पताल में घेर लिया था।

शाह ने अदालत को बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि सिविल अस्पताल से पुलिस द्वारा सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद माया कोडनानी कहां गयीं। शाह ने न्यायाधीश पी. बी. देसाई के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया।अदालत ने इस वर्ष अप्रैल में कोडनानी के, अपने बचाव में शाह एवं कुछ अन्य गवाहों को बुलाये जाने के आवेदन को मंजूरी दी थी।

वहीं, माया कोडनानी ने कहा है कि अहमदाबाद के निकट नरौदा गाम में हुए दंगों के दौरान वह विधानसभा के सत्र में भाग लेने के बाद सोला सिविल अस्पताल गयी थीं। माया के मुताबिक, वह उस स्थान पर थीं ही नहीं, जहां हिंसा हुई थी।उन्होंने कहा था कि तत्कालीन विधायक अमित शाह भी उस वक्त सोला सिविल अस्पताल में मौजूद थे।

साबरमती ट्रेन की बोगी में आग लगाने की घटना में मारे गए कारसेवकों के शव गोधरा से सोला सिविल अस्पताल लाये गये थे। शाह की गवाही उनके बयान की पुष्टि करेगी कि वह अपराध के वक्त कहीं और मौजूद थीं। वर्ष 2002 में विधायक रहीं कोडनानी को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में 2007 में कनिष्ठ मंत्री बनाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने तीन सप्ताह पहले विशेष एसआईटी अदालत से कहा कि वह मामले की सुनवायी चार महीने के भीतर पूरी करे। तत्कालीन प्रधान न्यायमूर्ति जे. एस. खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने निचली अदालत से कहा कि वह दो महीने के भीतर गवाहों का बयान दर्ज करने का काम पूरा करे।

 

बता दें कि इस मामले की सुनवाई कर रही एक विशेष अदालत ने इसी साल अप्रैल महीने में माया कोडनानी की उस याचिका को मंजूरी दे दी थी, जिसमें उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष को बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर बुलाने की अनुमति मांगी थी। कोडनानी ने शाह के अलावा 13 अन्य को बचाव पक्ष के गवाहों के तौर पर बुलाने की अनुमति की याचिका दाखिल की थी।

इससे पहले की सुनवाई के दौरान अदालत ने माया कोडनानी को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का पता ढूंढने के लिए और चार दिन दिए थे, क्योंकि वह नरोदा नरंसहार मामले में अपने बचाव में उन्हें अदालत में पेश करवाना चाहती हैं। कोडनानी ने कोर्ट से कहा था कि वह उनका पता नहीं ढूंढ पाई, जिस पर अदालत का समन पहुंचाया जा सके।

अदालत ने चार सितंबर को उन्हें अमित शाह का पता ढूंढने के लिए आठ सितंबर तक का वक्त दिया था, लेकिन कोडनानी के वकील ने और समय की मांग की थी। इस पर कोर्ट ने कोडनानी के वकील को और चार दिन देते हुए मामले की अगली सुनवाई की तारीख 12 सितंबर तय की थी।

बता दें कि अहमदाबाद के नरोदा गाम का नरसंहार 2002 के नौ बड़े साम्प्रदायिक दंगों में एक है। इस मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) ने की थी। गोधरा में ट्रेन में आगजनी की घटना के बाद 28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद के बाहरी इलाके नरोदा में भी नरसंहार हुए थे। नरोदा नरसंहार में अल्पसंख्यक समुदाय के 11 लोगों की हत्या कर दी गई थी।

इस मामले में 82 लोगों का ट्रायल चल रहा है। कोडनानी को नरौदा पाटिया दंगा मामले में दोषी करार देते हुए 28 साल कैद की सजा सुनायी गई है, फिलहाल वह अभी स्वास्थ्य का हवाला देकर जमानत पर रिहा हैं। माया कोडनानी 2002 में बीजेपी की विधायक थीं और बाद में गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री बनीं।

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