फर्जी खबरों के सहारे आतंकी आरोपियों का बचाव करने वाले एंकर को लोगों ने बताया अर्नब गोस्वामी का हिंदी वर्जन

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इन दिनों सोशल मीडिया पर भोपाल लोकसभा सीट से मालेगांव बम विस्फोट मामले में लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना कर चुकीं इस मामले में अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को अपना उम्मीदवार बनाए जाने के बाद निंदा का सामना कर रही है। हालांकि, कई लोगों ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को उम्मीदवार बनाने के बीजेपी के इस फैसले का समर्थन किया है, जिसमें विशेष रूप से मीडिया में स्थापित भगवा पार्टी के समर्थकों ने यह दावा किया कि प्रज्ञा को अदालत ने बरी कर दिया है।

न्यूज 18 समूह के मुखिया मुकेश अंबानी के चैनल के लिए काम करने वाले समाचार एंकर अमीश देवगन का नाम बीजेपी और साध्वी प्रज्ञा का बचाव करने वालों में सबसे ऊपर था। दरअसल, बीजेपी द्वारा 2008 मालेगांव बम धमाके की आरोपी साध्वी प्रज्ञा को भोपाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले की बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने ट्वीट कर निंदा की, जिसके जवाब में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अमीश देवगन ने उनका बचाव किया।

बीजेपी समर्थकों के निशाने पर रहने वालीं इस अभिनेत्री ने समाचार एजेंसी एएनआई के प्रज्ञा ठाकुर से बातचीत वाले एक अन्य ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा, ‘मध्य प्रदेश के प्रत्याशियों की हमारी शानदार सूची के अलावा एक संभावित आतंकवादी… मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा.. बीजेपी नफरत और विभाजन के अपने एजेंडे में बिल्कुल नग्न है।’

वहीं, इसके जवाब में अमीश देवगन ने लिखा, “वह अदालत से बरी हो चुकीं हैं, जो हिंदू आतंकवाद की झूठी कहानी थी। अब आप न्यायपालिका पर भी भरोसा नहीं करतीं?” उन्होंने आगे लिखा, “हिंदू कभी अक्रांता नहीं रहे, इतिहास गवाह है। टाइम पास के लिए कुछ भी न लिखें। फिर आप पड़ोसी देश (पाकिस्तान) में सुपरस्टार बन जातें हैं।”

प्रज्ञा के बचाव वाला देवगन का यह ट्वीट जल्द ही वायरल हो गया। लोगों ने उनपर सोशल मीडिया यूजर्स को फर्जी खबरों के सहारे गुमराह करने का आरोप लगाया। वहीं, इस ट्वीट के कुछ देर बाद देवगन को अर्नब गोस्वामी का हिंदी वर्जन (संस्करण) बताते हुए लोग सोशल मीडिया पर ट्रोल करने लगे। बता दें कि अक्सर देवगन पर यूजर्स अर्नब गोस्वामी का नकल करने का आरोप लगाते हुए मजा लेते रहते हैं।

साध्वी पर अभी भी चल रहा है केस

साध्वी प्रज्ञा सितंबर 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए एक बम धमाके के सात आरोपियों में से एक हैं, जिन पर इस मामले में मुकदमा चल रहा है। 2008 मालेगांव ब्लास्ट मामले की जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक शाखा (एटीएस) के नेतृत्व में हुई थी। एटीएस चार्जशीट के मुताबिक प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत धमाके में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल उनके नाम पर होना था।

मामले की शुरुआती जांच एटीएस ने की थी, जिसे बाद में एनआईए को सौंप दी गई थी। एनआईए की चार्जशीट में भी उनका नाम डाला गया। 2008 में गिरफ्तार हुईं साध्वी प्रज्ञा को 2015 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सबूतों के अभाव में क्लीन चिट दे दी थी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट में यह बात मानने से इनकार कर दिया कि जब धमाके में उनकी मोटर साइकिल का इस्तेमाल हुआ है, तब उनकी संलिप्तता न होने की बात पर विश्वास करना मुश्किल है।

इसके बाद अदालत ने उन पर से महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) हटा लिया था। मकोका हटाए जाने के करीब एक साल बाद साल 2008 के मालेगांव बम धमाकों में 30 अक्टूबर को सभी सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय हुआ था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा इस मामले में कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी सात आरोपियों पर यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रीवेंशन एक्ट) के आरोप तय किए गए थे। एनआईए ने कर्नल पुरोहित समेत सभी आरोपियों पर आतंकी साजिश रचने, हत्या और तमाम दूसरे अपराधों के तहत आरोप तय किए।

साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित पर से भले ही मकोका हटा लिया गया हो, लेकिन इन मामले में सात आरोपियों पर अब भी आतंक के खिलाफ बनाए गए कानून गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धाराओं के तहत मामला चल रहा है। यूएपीए के आरोप अब भी उन पर हैं और इसी मामले में 2017 में मिली जमानत पर वे फिलहाल जेल से बाहर हैं। बीजेपी ने उन्हें भोपाल से कांग्रेस के दिग्विजय सिंह के खिलाफ उम्मीदवार बनाया है।

देखिए, लोगों की प्रतिक्रियाएं:

बता दें कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक बाइक में बम लगाकर विस्फोट किया गया था, जिसमें 6 लोगों की मौत हुई थी और 100 से अधिक लोग जख्मी हो गए थे। मालेगांव उत्तर महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है। धमाका एक मोटरसाइकिल में रखे बम से हुआ था। इस संबंध में आजाद नगर पुलिस थाने में हत्या, हत्या की कोशिश और आपराधिक साजिश के साथ यूएपीए के तहत मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में दायर की गई चार्जशीट में 14 आरोपियों के नाम थे। साध्वी प्रज्ञा पर भोपाल, फरीदाबाद की बैठक में धमाके की साजिश रचने के आरोप लगे थे। साध्वी और कर्नल पुरोहित को 2008 में गिरफ्तार किया था।

 

 

 

 

 

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