बाबा साहब आंबेडकर का जन्म दिन और दलित वोट बैंक : एक अनार और सौ बीमार

0
>

इरशाद अली

अगले साल यूपी में मुख्यमंत्री की कुर्सी का फैसला होना है जिसकी तैयारियों में सभी राजनीतिक दल ऐड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। यूपी चुनावों में दलित फैक्टर एक अहम रोल निभाता है। इसलिये सभी दल चाहते है कि दलित वोट बैंक उनकी झोली में आ गिरें। अब से कुछ साल पहले तक दलित वोट बैंक केवल बसपा या बामसेफ की बपौति हुआ करता था जिसके बल पर कई बार मायावती की मुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी हुई। लेकिन इस बार के चुनावों में और भी नये दिग्गज दलित वोट बैंक को टारगेट करने में लग गए हैं।

अगले दो दिनों बाद 14 अप्रैल को बाबा साहेब अंबेडकर का जन्मदिवस मनाया जाने वाला हैं। जिसकी तैयारियों में सभी राजनीतिक दल सक्रिय हैं। कोई नहीं चाहता कि दलित वोट बैंक उनसे नाराज रहें। भाजपा ने अपने स्टार प्रचारक नरेन्द्र मोदी को इस मोर्च पर उतारा हैं। 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री एक बड़ी रैली का आयोजन महू में करने जा रहे हैं।

Also Read:  VIDEO: BJP विधायक ने कहा भारत एक हिंदू राष्ट्र बनने वाला है और देश के सभी मुसलमानों को हिंदू बना दिया जाएगा

जिसके लिये महिनों पहले से तैयारियां चल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस रैली को सफल बनाने के लिये प्रदेश की भाजपा यूनिट ने शासन और प्रशासन दोनों को काम पर लगा रखा हैं। जिले के प्रत्येक कालेज से 100 छात्रों को अनिवार्य रूप से रैली में शामिल होना है। सभी कालेजों को कलेक्टर की तरफ से सख्त ताकिद कर दी गयी हैं।

माना जा रहा है प्रधानमंत्री मोदी दलितों के लिये कई सारी लुभावनी पुडि़यें खोलने वाले है। मायावती 14 अप्रैल पर कुछ खास करने जा रही है वह एक साथ कई बड़े कार्यक्रमों में शिरकत करेगी और सभी जिलों में बाबा साहेब की शोभायात्राएं निकाली जाएगी। बसपा का दलित विंग प्रत्येक वर्ष 14 अप्रैल को ऐसे आयोजन करता हैं। इस तरह के आयोजनो से मायावती अपनी शक्ति प्रदर्शन भी करती हैं।

Also Read:  Apple Unveils Brand New iPhone 6s and 6s plus

इस समय यूपी में मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी सत्ता पर कब्जा जमाए हुए है इसलिये मुलायम सिंह जी अखिलेश के साथ सिर्फ साईकल रैली में ही व्यस्त रहेगें। जबकि मैदान में एक नये दिग्गज अरविन्द केजरीवाल की निगाह भी यूपी और पंजाब इलेक्शन को लेकर तेज है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल 14 अप्रैल को तालकटोरा स्टेडियम में एक बड़ी रैली करने जा रहे है वो दिल्ली से ही पंजाब और यूपी चुनाव में दलित वोट बैंक को रिझाने के लिये बिगुल बजाने वाले हैं।

Also Read:  Man says he murdered four minor girls on tantrik's advice to cure wife's 'mental illness'

इसी मौके पर शाम होते होते आपको टेलिविजन पर राहूल गांधी भी किसी दलित के घर खाना खाते हुए दिख जाने वाले हैं। यूपी चुनावों में अपनी-अपनी पार्टी की तरफ से सभी राजनीतिक दल दलित वोट बैंक को लुभाने में लगे हुए हैं। सभी पार्टियां दलितों के विकास के लिये चिंतित दिखाई पड़ती हैं लेकिन पिछले 60 सालों से दलित जहां खड़ा था आज भी वहीं खड़ा हुआ हैं।

और यकीन मानिए उत्तर प्रदेश और पंजाब के चुनावों के बाद इन नेताओं को दलितों के पिछड़े होने का एहसास फिर तब आयेगा जब किसी दलित बहुल्य राज्यों जैसे मध्यप्रदेश या छत्तीसगढ़ में इलेक्शन की तैयारियां शुरू हो जाएँगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here