अलवर हत्याकांड: अधमरे अकबर को अस्पताल ले जाने के बजाय पुलिसकर्मियों ने पहले गायों को पहुंचाया गोशाला, घायल हालत में घंटों तक घुमाती रही पुलिस

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राजस्थान के अलवर में पहलू खान के बाद अब अकबर खान उर्फ रकबर खान की पीट-पीटकर हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। गोरक्षकों के बाद अब अलवर पुलिस पर मारपीट जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं। इसके अलावा इस मामले में पुलिस की घोर अमानवीयता सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुलिस पीड़ित अकबर खान को घायल हालत में अस्पताल ले जाने से पहले घंटों तक घुमाती रही। इतना ही नहीं पुलिस ने घायल अकबर को पीटा भी था। जिसके कारण उसकी जान चली गई।

(Sanjeev Verma/HT Photo)

मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार पुलिस को देर रात 12:41 बजे घटना की सूचना मिली और पुलिस 1:20 बजे वहां पहुंची। पुलिस के साथ गए नवल किशोर के अनुसार पुलिसवालों ने घायल के शरीर को धोया, क्योंकि वह कीचड़ से सना था, उसके बाद उन्होंने कई अन्य काम किए। उनका पहला पड़ाव नवल किशोर का घर था, जहां से उन्होंने गाड़ी का इंतजाम किया ताकि गायों को स्थानीय गोशाला ले जाया जा सके।

इसके बाद पुलिस जब्त की गई गायों को गोशाला ले गई, फिर पुलिस थाने गई और यहां तक कि चाय पीने के लिए भी रुकी। अस्पताल पहुंचने तक अकबर की जान जा चुकी थी। राजस्थान पुलिस ने अकबर को पीट-पीटकर मौत के घाट उतारने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि तीन संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा।

अकबर को अस्पताल पहुंचाने के बजाय पुलिस ने पहले गायों को पहुंचाया गोशाला

अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने गंभीर रूप से घायल खान को सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र पहुंचाने से पहले घटनास्‍थल से बरामद दो गायों को गोशाला पहुंचाने को प्राथमिकता दी। रिपोर्ट के मुताबिक अगर अकबर को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।

अखबार के मुताबिक पुलिसकर्मियों ने पहले दो गायों को लेकर 10 किलोमीटर दूर गोशाला गए और उसके बाद अकबर खान को अस्पताल ले जाया गया। स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र के ओपीडी रजिस्‍टर के मुताबिक खान को सुबह 4 बजे वहां लाया गया था। जबकि एफआईआर में कहा गया है कि ‘गोरक्षक’ नवल किशोर शर्मा ने रात 12.41 बजे इस हमले के बारे में पुलिस को सूचना दे दी थी।

रामगढ़ पुलिस का कहना है कि घटना की सूचना मिलने के 15 से 20 मिनट के अंदर उनकी टीम घटनास्‍थल पर पहुंच गई थी। रविवार को जब पत्रकारों ने पुलिस से पूछा कि खान को अस्पताल पहुंचाने में इतना ज्‍यादा समय क्‍यों लगा तो उन्‍हें कोई जवाब नहीं सूझ रहा था। हालांकि एफआईआर में कहा गया है कि पुलिस मौके पर पहुंच गई और खान के शव को तत्‍काल हॉस्पिटल पहुंचाया गया।

(Sanjeev Verma/HT Photo)

परिवार में अकेला कमाने वाला था अकबर

राजस्थान के अलवर में शुक्रवार को पशुतस्करी के आरोप में जिस शख्स की हत्या कर दी गई है वह अपने परिवार के लिए रोटी कमाने वाला अकेला शख्स था। भीड़ के हमले में जान गंवाने वाला अकबर खान हरियाणा के मेवात जिले का रहने वाला था। अब उसके आश्रितों के सामने जीने का संकट आकर खड़ा हो गया है। रकबर के घर में पत्नी, माता-पिता और सात बच्चे हैं।

हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक, अकबर के रिश्तेदारों ने बताया कि वह गांव में ही डेरी का बिजनेस शुरू करना चाहता था। इसके लिए वह कुछ लोगों से कर्ज भी लिया था। अकबर अपने दोस्त असलम के साथ राजस्थान के अलवर जिले के लालवंडी गांव दो गाय खरीदने गया था ताकि वह अपने डेरी कारोबार को और बड़ा कर सके। शनिवार को गांव लौटे असलम ने रकबर के घरवालों को बताया कि वह अंधेरे का फायदा उठाकर खेतों में छिप गया जबकि अकबर पर भीड़ ने हमला बोल दिया।

असलम ने बताया कि दोनों लोग रकबर की मोटरसाइकिल में शाम पांच बजे गांव से निकले थे और रात को लालवंडी गांव पहुंचे थे। रकबर ने उसे यह बोलकर साथ ले गया था कि दो गाय खरीदने जाना है। उन लोगों के पास दो बछड़े पहले से थे। दोनों वहां 60 हजार रुपए में दो गाय खरीदीं। अकबर गायों के पीछे-पीछे चल रहा था जबकि असलम मोटरसाइकिल पर किनारे-किनारे चल रहा था। तभी एक फायर की आवाज सुनाई दी और कुछ लोग यह कहते हुए उनके पीछे दौड़े कि कोई गाय चुराकर लिए जा रहा है।

असलम के अनुसार, लोग उनकी ओर आ रहे थे तो वह डर के मारे खेतों में छुप गया, लेकिन अकबर गायों को पकड़कर चल रहा था तो वह नहीं भागा। असलम ने बताया कि अंधेरे के कारण वह लोगों को पहचान तो नहीं सकता लेकिन उनकी आवाज पहचान सकता है क्योंकि वह बहुत जोर-जोर से उन्हें गाली दे रहे थे। उसने बताया कि वह शनिवार की सुबह तक वह खेतों में छुपा रहा और सुबह होने पर दूसरे वाहन में लिफ्ट मांगकर अपने गांव पहुंचा।

 

 

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