काम संभालते ही एक्शन में CBI चीफ आलोक वर्मा, नागेश्वर राव द्वारा जारी सभी तबादलों को किया रद्द

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) निदेशक का पद संभालते ही आलोक वर्मा फिर से एक्शन में आ गए हैं। जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के 77 दिन बाद बुधवार (9 जनवरी) को अपनी ड्यूटी पर लौटे आलोक वर्मा ने तत्कालीन निदेशक (प्रभारी) एम नागेर द्वारा किए गए लगभग सारे तबादले रद्द कर दिए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने 77 दिन बाद अपना कार्यभार बुधवार (9 जनवरी) को संभाल लिया।

 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को छुट्टी पर भेजने के सरकारी आदेश को मंगलवार (8 जनवरी) को रद्द कर दिया था। वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच तकरार शुरु होने के बाद सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था और उनके सारे अधिकार ले लिए थे। उसके बाद 1986 बैच के ओडिशा काडर के आईपीएस अधिकारी राव को 23 अक्टूबर, 2018 को देर रात को सीबीआई निदेशक के दायित्व और कार्य सौंपे गए थे।

अधिकारियों के अनुसार अगली सुबह ही राव ने बड़े पैमाने पर तबादले किए। उनमें अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच करने वाले अधिकारी जैसे डीएसपी एके बस्सी, डीआईजी एमके सिन्हा, संयुक्त निदेशक एके शर्मा भी शामिल थे। एक अधिकारी ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि वर्मा ने बुधवार को अपना दायित्व संभाल लिया और राव द्वारा किये गये सारे तबादले रद्द कर दिए।

वर्मा और उप विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ एजेंसी ने भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था और दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने वाला अक्टूबर का यह आदेश एजेंसी के इतिहास में सरकार के हस्तक्षेप का यह अपनी तरह का पहला मामला था। वर्मा ने इस कदम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजने के केंद्र के निर्णय को रद्द करते हुए उनकी बहाली कर दी।

हालांकि वर्मा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की सीवीसी जांच खत्म होने तक उन्हें कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला लेने से रोक दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि वर्मा के खिलाफ आगे कोई भी फैसला उच्चाधिकार प्राप्त समिति लेगी जो सीबीआई निदेशक का चयन एवं नियुक्ति करती है। बहरहाल, वर्मा को शक्तियों और अधिकारों से वंचित करने की तलवार अब भी उनके सिर पर लटकी हुई है।

शीर्ष अदालत ने कहा है कि सीबीआई प्रमुख का चयन करने वाली उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति अब भी वर्मा से जुड़े मामले पर विचार कर सकती है, क्योंकि सीवीसी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही है। चयन समिति को एक हफ्ते के भीतर बैठक बुलाने को कहा गया है। न्यायालय ने कहा कि कानून में अंतरिम निलंबन या सीबीआई निदेशक को हटाने के संबंध में कोई प्रावधान नहीं है।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगाई ने एक उच्च अधिकार प्राप्त चयन समिति के लिए उनके बाद सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति एके सीकरी को मनोनीत किया है। यह समिति सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा के भविष्य पर फैसला करेगी। समिति की देर शाम बैठक प्रधानमंत्री आवास पर हुई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और जस्टिस एके सीकरी शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय सतर्कता आयोग ने इस बैठक में अपना पक्ष रखा और कुछ दस्तावेज भी सौंपे।

इस चयन समिति में प्रधानमंत्री, सीजेआई और सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता शामिल होते हैं। चूंकि सीजेआई वर्मा को सीबीआई निदेशक पद पर बहाल करने का मंगलवार को फैसला देने वाली पीठ का हिस्सा थे, उन्होंने समिति की बैठक से खुद को दूर रखा है। इस समिति को एक सप्ताह के भीतर बैठक का आदेश दिया गया है। गौरतलब है कि वर्मा को केंद्र सरकार के 23 अक्टूबर के फैसले के बाद छुट्टी पर भेज दिया गया था और वह 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

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