आलोक नाथ के मानहानि केस पर विंता नंदा ने किया पलटवार, बोलीं- हम डरने वाले नहीं, लड़ाई जारी रहेगी

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हिंदी सिनेमा और सीरियल की दुनिया के बेहद कामयाब कलाकार और एक ‘संस्कारी’ शख्स की छवि रखने वाले अभिनेता आलोक नाथ पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली लेखिका एवं प्रोड्यूसर विंता नंदा की वकील ने कहा है कि उनकी मुवक्किल 19 साल पहले उनके साथ हुई घटना के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगी और मानहानि का मामला इसके रास्ते में आने वाला नहीं है। विंता की वकील के इस बयान के एक दिन पहले इस आशय की रिपोर्ट आईं कि आलोक नाथ की पत्नी आशु सिंह ने लेखिका के आरोपों की पुलिस जांच करवाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

आपको बता दें कि विनता ने आलोक नाथ पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। विनता की वकील ध्रुति कपाडिया ने एक बयान में कहा कि वे इस मामले से कानूनी तौर पर निपटने जा रहे हैं और कहा कि ‘हमें अभी तक किसी मानहानि के मामले की जानकारी नहीं है।’ समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, कपाडिया ने कहा, “हम कानून के हिसाब से सब कुछ करेंगे।”

आलोक नाथ ने विंता नंदा पर दर्ज किया मानहानि का मुकदमा

आलोक नाथ ने सोमवार (15 अक्टूर) को मीटू अभियान के तहत उन पर आरोप लगाने वाली लेखका व फिल्म निर्माता विंता नंदा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा कायम कर दिया। उन्होंने मांग की है कि वे लिखित माफीनामा एवं एक रुपया हर्जाना दें। आलोक नाथ ने पत्नी आशु नाथ के साथ यह मुकदमा दायर किया है। आलोक नाथ ने खुद पर लगे आरोपों से इंकार किया है। इसके पहले वे कह चुके थे कि गलत आरोप लगाने वली महिला पर वे मुकदमा करेंगे।

लेखिका विंता नंदा ने उन पर 19 वर्ष पहले यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। उनके बाद टीवी कलाकार संध्या मृदुल एवं दीपिका आमीन ने भी पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था। विंता नंदा के आरोपों पर सिने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन (सिन्टा) की तरफ से आलोक नाथ को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। उसमें स्पष्ट लिखा है कि क्यों ना उन्हें सिन्टा से बाहर कर दिया जाए।

इस पर आलोक नाथ ने कहा कि एसोसिएशन को यह नोटिस खारिज करना चाहिए, क्योंकि दोषी साबित होने तक वे निर्दोष हैं। आलोक नाथ ने विंता नंदा के आरोपों पर कहा था कि वे ना तो इंकार कर रहे हैं ना ही स्वीकार करते हैं। उनके साथ किसी और ने ‘गलत’ किया होगा। विंता ने अपनी पोस्ट में आलोक नाथ का नाम नहीं, बल्कि ‘संस्कारी’ कहलाने वाला व्यक्ति लिखा था।

‘मी टू’ अभियान ने पकड़ा तूल

आपको बता दें कि भारत में जारी ‘मी टू’ अभियान (यौन उत्पीड़न के खिलाफ अभियान) तूल पकड़ता जा रहा है। कई अन्य महिलाएं अपने अनुभवों को सार्वजनिक तौर पर शेयर कर रही हैं। अभिनेत्री तनुश्री दत्ता द्वारा मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर पर यौन शोषण का आरोप लगाए जाने के बाद अब अलग-अलग इंडस्ट्री की बाकी हस्तियों ने भी अपने साथ हुए यौन दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है।

फिल्म इंडस्ट्री से ‘मी टू’ अभियान की शुरुआत होने के बाद इसकी चपेट में मीडिया जगत भी आ गया है और इसकी लपटें मोदी सरकार के एक मंत्री को अपने लपेटे में ले रही हैं। अपने समय के मशहूर संपादक व वर्तमान में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर पर 9 वरिष्ठ महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए हैं। इन महिलाओं ने उन पर तमाम मीडिया संस्थानों में संपादक रहते हुए यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है।

नाना पाटेकर के बाद जहां डायरेक्टर विकास बहल, सिंगर कैलाश खेर, लेखक चेतन भगत, अभिनेता रजत कपूर, मॉडल जुल्फी सैयद, अभिनेता आलोक नाथ, हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक प्रशांत झा, रघु दीक्षित, कमेंटेटर सुहेल सेठ, महिला कॉमिक स्टार अदिति मित्तल, बॉलीवुड के शोमैन सुभाई घई, फिल्ममेकर साजिद खान, लेखक-निर्देशक पीयूष मिश्रा और बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी भी ‘मी टू’ की चपेट में आए हैं, जिनपर यौन उत्पीड़न, बदसलूकी, गलत तरीके से छूने जैसे आरोप लगे हैं।

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