मेडिकल एडमिशन घोटाला: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस श्रीनारायण शुक्ला से सभी न्यायिक कामकाज छिना गया

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मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) मामले में आंतरिक जांच के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस श्रीनारायण शुक्ला से सभी न्यायिक काम ले लिए गए हैं। इंडियन एक्सप्रेस अखबार के अनुसार, फिलहाल शुक्ला 90 दिनों की छुट्टियों पर गए हैं जिसकी अनुमति उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने दी है। आंतरिक जांच की रिपोर्ट पर भारत के मुख्य न्यायाधीश की कार्यवाही के बाद उन्होंने छुट्टी की अर्जी लगाई थी।

PHOTO: Indian Express

रिपोर्ट के मुताबिक आंतरिक जांच में पाया गया है कि जीसीआरजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस मामले में उनका फैसला कथित तौर पर न्यायिक रूप से अनैतिक था। यह मामला प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट वाले आपराधिक मामले से अलग है। प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है और मुख्य न्यायाधीश ने जस्टिस शुक्ला का नाम एफआईआर में दर्ज करने की अनुमति सीबीआई को नहीं दी थी।

दैनिक जागरण के मुताबिक, तीन जजों की इन हाउस जांच कमेटी की रिपोर्ट में मेडिकल कॉलेज प्रवेश घोटाले में जांच के घेरे में आए जस्टिस शुक्ला पर लगे आरोपों में दम पाए जाने के बाद उनके खिलाफ यह कार्रवाई हुई है। जागरण के अनुसार माना जा सकता है कि अब उन्हें पद से हटना ही होगा या फिर महाभियोग चलाकर उन्हें हटाया जा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ के एक मेडिकल कॉलेज को सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2017-18 के सत्र में प्रवेश लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद हाई कोर्ट में जस्टिस शुक्ला की पीठ ने मेडिकल कॉलेज को इस वर्ष छात्रों को प्रवेश देने की अनुमति दे दी थी। इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र ने जस्टिस शुक्ला पर लगे आरोपों की इन हाउस जांच प्रक्रिया अपनाते हुए तीन न्यायाधीशों की जांच समिति बनाई थी।

समिति ने रिपोर्ट प्रधान न्यायाधीश को सौंप दी है। इसमें जस्टिस शुक्ला पर लगे आरोपों को सही बताया गया है। जागरण के मुताबिक, सूत्र बताते हैं कि प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्र ने जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद जस्टिस शुक्ला को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने या पद से इस्तीफा देने का सुझाव दिया था, लेकिन जस्टिस शुक्ला ने नहीं माना।

इसके बाद प्रधान न्यायाधीश ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दिलीप भोसले से कहा कि वे जस्टिस शुक्ला का न्यायिक कामकाज वापस ले लें।’ तत्पश्चात जस्टिस शुक्ला से न्यायिक कामकाज वापस ले लिया गया है। उनका न्यायिक कामकाज वापस लिये हुए एक सप्ताह से ज्यादा का समय हो गया है।

जागरण के मुताबिक, सूत्र बताते हैं कि समिति ने रिपोर्ट में जस्टिस शुक्ला को पद से हटाए जाने की भी सिफारिश की है। लेकिन संविधान के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज को सिर्फ महाभियोग के जरिए ही हटाया जा सकता है। ऐसे में जस्टिस शुक्ला को पद से हटाने के लिए भी वही प्रक्रिया अपनानी होगी। समिति की रिपोर्ट भी केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।

 

 

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